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गयाजी के ऐतिहासिक गांधी मैदान में कल से तीन दिवसीय विश्व शांति सम्मेलन की शुरुआत हो रही है। 11 से 13 अप्रैल तक चलने वाला यह आयोजन इस बार सिर्फ औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विविधता और युवा ऊर्जा का मंच बनकर सामने आ रहा है। पीस एसोसिएशन ऑफ इंडिया के बैनर तले हो रहे इस सम्मेलन को लेकर शहर में उत्साह है। आयोजकों का साफ कहना है कि यह आयोजन शांति और सद्भाव का संदेश देने के साथ समाज के हर वर्ग को जोड़ने का प्रयास है। यही वजह है कि कार्यक्रम की रूपरेखा में धर्म, साहित्य, कला और खेल चारों क्षेत्रों को शामिल किया गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसोसिएशन के सचिव इकबाल हुसैन ने बताया कि पहले दिन 11 अप्रैल को अंतरधार्मिक संवाद होगा। एक ही मंच पर अलग-अलग धर्मों के धर्मगुरु और स्कॉलर बैठकर शांति और भाईचारे का संदेश देंगे। अलग-अलग धर्म के प्रतिनिधि एक मंच पर होंगे सनातन, इस्लाम, सिख और ईसाई धर्म के प्रतिनिधि एक साथ मंच साझा करेंगे। खास बात यह है कि युवाओं के बीच लोकप्रिय शिक्षक खान सर भी इस दिन मौजूद रहेंगे और नई पीढ़ी को सकारात्मक दिशा देने का संदेश देंगे। दूसरा दिन यानी 12 अप्रैल को “शहादत दिवस” के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन मुशायरा और कवि सम्मेलन का आयोजन होगा। शायर और कवि अपनी रचनाओं के जरिए इंसानियत, प्रेम और शांति का संदेश देंगे। साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। तीसरा और अंतिम दिन 13 अप्रैल को खेल के नाम रहेगा। इस दिन इंडियन बॉडीबिल्डिंग फेडरेशन के सहयोग से भव्य बॉडीबिल्डिंग चैंपियनशिप आयोजित की जाएगी। मनौव्वर हुसैन पहलवान की स्मृति में होने वाले इस आयोजन में देशभर से 300 से अधिक प्रतिभागियों के पहुंचने की संभावना है। आयोजकों का मानना है कि इससे युवाओं को फिटनेस और अनुशासन की ओर प्रेरणा मिलेगी। केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी मुख्य अतिथि होंगे सम्मेलन को राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा समर्थन मिल रहा है। पहले दिन केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी मुख्य अतिथि होंगे। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, मंत्री डॉ. अशोक चौधरी और एमएलसी आफाक अहमद खान भी शामिल होंगे। दूसरे दिन मंत्री डॉ. संतोष सुमन के साथ कई विधायक मौजूद रहेंगे। समापन समारोह में मगध प्रमंडल की आयुक्त, आईजी, डीएम और एसएसपी समेत कई अधिकारी शामिल होंगे। आयोजकों ने गया वासियों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में पहुंचकर इस आयोजन को सफल बनाएं। उनका कहना है कि यह सम्मेलन सिर्फ कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने की एक पहल है। बता दें कि बोधगया और महाबोधि मंदिर के कारण पहले से अंतरराष्ट्रीय पहचान रखने वाला गया अब ऐसे आयोजनों से सामाजिक और सांस्कृतिक संवाद का भी केंद्र बनता जा रहा है।
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