
ऑनलाइन धोखाधड़ी का खतरा बढ़ने की चिंताओं के बीच केंद्र सरकार WhatsApp के ‘यूजर ID’ फीचर की जांच करने जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस फीचर से जुड़े सुरक्षा और प्राइवेसी से जुड़े पहलुओं पर विचार करने के बाद ही आगे कोई कदम उठाएगी।
मान लीजिए, आप किसी शादी, जिम या अपने बच्चे के स्कूल में किसी नए व्यक्ति से मिलते हैं, और वे कॉन्टैक्ट में रहने के लिए आपका नंबर मांगते हैं। यह बहुत जल्दी और बहुत ज्यादा लग सकता है। फोन नंबर सिर्फ किसी को कॉल करने का जरिया नहीं है, यह आपके बैंक अकाउंट, आपकी पहचान, और असल में आपके बारे में हर चीज से जुड़ा होता है।
यही समस्या ग्रुप चैट में भी होती है। उदाहरण के लिए, क्लास के WhatsApp ग्रुप में शामिल होने वाले माता-पिता अक्सर अपना नंबर ऐसे लोगों के साथ शेयर कर देते हैं जिनसे वे कभी मिले भी नहीं होते। WhatsApp ने इसका एक आसान समाधान निकाला है: लोगों को यूजरनेम इस्तेमाल करने दें, ताकि किसी को सिर्फ ‘हेलो’ कहने के लिए अपना असली नंबर न देना पड़े।
इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) इस फीचर को ब्लॉक करने के कानूनी तरीकों पर विचार करेगा। यह बात तब सामने आई है जब जानकारों ने कहा कि भारत में WhatsApp के इस नए टूल का गलत इस्तेमाल हो सकता है, जहां ऑनलाइन स्कैमर्स लोगों को धोखा देने के लिए दूसरों की पहचान का इस्तेमाल कर सकते हैं।
सूत्रों ने बताया कि सरकार उस फीचर की कानूनी वैधता की जांच करेगी जो किसी व्यक्ति को मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर अपना फोन नंबर छिपाने की सुविधा देता है। उन्होंने कहा कि अगर इसमें कोई जोखिम पाया जाता है, तो सरकार Meta को कानूनी नोटिस भेज सकती है।