
West Bengal: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मंगलवार को बताया कि उसने मालदा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित सड़क अवरोधों और न्यायिक अधिकारियों को अवैध बंधक बनाने से जुड़े चार अलग-अलग मामलों में 31 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया है
अप्रैल में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मालदा क्षेत्र में हुई घटनाओं के संबंध में विभिन्न डिजिटल, तकनीकी, दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्यों के साथ-साथ कई गवाहों की जांच के आधार पर कोलकाता स्थित एनआईए विशेष न्यायालय में आरोप पत्र दायर किए गए हैं।
एनआईए के अनुसार , आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023, राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 और पश्चिम बंगाल लोक व्यवस्था रखरखाव (डब्ल्यूबीएमपीओ) अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं ।
SIR के दौरान मालदा में हुआ था भारी विरोध
गौरतलब है कि अप्रैल में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान बंगाल के मालदा में भारी विरोध प्रदर्शन हुआ था। उस समय प्रदर्शनकारियों ने नाम काटे जाने का आरोप लगाते हुए सड़कों को जाम किया और कई न्यायिक अधिकारियों को घंटों बंधक बनाए रखा जिसके बाद पूरे राज्य भर में बवाल देखा गया।
सुप्रीम कोर्ट ने लिया था स्वतः संज्ञान
न्यायिक अधिकारियों को घंटों बंधक बनाए रखने के मामले को सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। इसके बाद चुनाव आयोग के निर्देश पर एनआईए ने जांच को अपने हाथ में ले लिया। इसके बाद अब NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) ने इस मामले में 31 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है।
एनआईए ने आरोपपत्रों में क्या कहा?
एनआईए ने आरोपपत्रों में स्पष्ट रूप से कहा है, “आरोपियों ने कार्यों ने संवैधानिक चुनावी प्रक्रिया के काम कर रहे लोक सेवकों द्वारा आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा उत्पन्न की थी। आरोपियों ने अपनी गैरकानूनी गतिविधियों से क्षेत्र में कानून व्यवस्था को भी बिगाड़ा था।
एनआईए ने आगे कहा कि वह साजिश और गैरकानूनी कार्रवाइयों में शामिल अन्य फरार आरोपियों और संदिग्धों की पहचान करने, उनका पता लगाने और उन पर मुकदमा चलाने के लिए अपनी जांच जारी रखे हुए है, जिन्होंने संवैधानिक और वैधानिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया।