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‘VIP ट्रीटमेंट से पहले हमें नशीली दवाइयां खिला दी जाती थी। कभी-कभी इंजेक्शन भी दिया जाता था, ताकि हमलोग कस्टमर की हर डिमांड बिना विरोध पूरी करें। हमें कटिहार, पूर्णिया, पंजीपारा और सिलीगुड़ी जैसे अलग-अलग शहरों में भेजा जाता था। एक रात का 10 से 15 हजार रुपए मिलता था, लेकिन ये सारा पैसा मुन्नी और उसका बॉयफ्रेंड रख लेता था।’ यह दर्दनाक बयान उस नाबालिग पीड़िता का है, जो पिछले 6 महीने से सेक्स रैकेट के चंगुल में फंसी थी। अभी तक इसने करीब 10 कस्टमर को सर्विस दी है। किशनगंज के सदर थाना क्षेत्र के खगड़ा रेड लाइट एरिया में पुलिस ने रविवार को छापा मारा। इस दौरान देह व्यापार के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। इस कार्रवाई में 3 युवतियां, दो नाबालिग और एक मूक-बधिर नाबालिग लड़की को मुक्त कराया गया है। मामले में तीन महिलाओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है, जबकि एक महिला और एक युवक को गिरफ्तार किया गया है। पकड़ा गया युवक ग्राहक के रूप में वहां पहुंचा था। कहां और कैसे लाई जाती थी लड़कियां? कब से चल रहा था रैकेट? कौन था इसका मुख्य मास्टरमाइंड? लड़कियों का बैकग्राउंड क्या था? कहां-कहां दी जाती थी सर्विस? इन सारे सवालों का जवाब यहां पढ़िए… घटना से जुड़ी तस्वीरें देखिए… अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए पूरी खबर… जेल में बैठकर चला रहा था सेक्स रैकेट DSP अशोक कुमार ने बताया, आजादी के पहले से यहां पर रेड लाइट एरिया का संचालन हो रहा है। इस पूरे रैकेट का मुख्य मास्टरमाइंड कृष्ण खलीफा है, जो पिछले 11 महीने से जेल में बंद है। इसके बावजूद वह जेल से ही इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। वह अपनी बहन मुन्नी बेगम और उसके बॉयफ्रेंड सोनू के जरिए पूरे गिरोह को चला रहा था। कृष्ण खलीफा जेल में बैठकर अपनी बहन को यह तक बताता था कि डील कैसे करनी है, किस तरह लड़कियों को हैंडल करना है और ग्राहकों से कैसे पैसे लेने हैं। शादी-नौकरी का झांसा देकर बुलाया जाता था किशनगंज मुक्त कराई गई लड़कियों ने पुलिस को बताया कि उन्हें सोशल मीडिया के जरिए फंसाया जाता था। लड़के पहले फेसबुक, इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर दोस्ती करते थे। इसके बाद प्यार का झांसा देकर शादी का वादा करते थे। जब लड़कियां पूरी तरह से भरोसे में आ जाती थीं, तब उन्हें किशनगंज बुलाया जाता था। कुछ को शादी का झांसा देकर तो कुछ को नौकरी और बेहतर जिंदगी का सपना दिखाकर उन्हें अपने चंगुल में लिया जाता था। लड़कियों को फंसाने में 5-6 लड़कों की टीम पुलिस के मुताबिक, यह काम अकेले नहीं होता था, बल्कि इसके लिए एक पूरी टीम काम कर रही थी। करीब 5 से 6 लड़के अलग-अलग नाम और पहचान से सोशल मीडिया पर लड़कियों से संपर्क करते थे। ये लोग अलग-अलग राज्यों और जिलों में बैठकर इस नेटवर्क को फैलाते थे। फिलहाल पुलिस इन सभी की पहचान में जुटी है। रात में देह व्यापार के लिए लाई जाती थीं लड़कियां पश्चिम बंगाल बॉर्डर से सटे किशनगंज में रहने वाले मोहम्मद असरफ का कहना है, मैं यहां पर 4 साल से रह रहा हूं। हर रात देखते हैं ई-रिक्शा की मदद से लड़कियों को स्टेशन से हमारे घर के बगल वाले ठिकाने पर लाकर रखा जाता है। इसमें कुछ नेपाली तो कुछ बिहारी लड़कियां होतीं हैं। मोहम्मद असरफ ने बताया, हमारे घर से सटे एक घर में अक्सर नेपाली-बंगाली लड़कियां लाई जाती हैं। इन लड़कियों को घर से बाहर निकलने, किसी से बात करने की इजाजत नहीं होती। कई बार मारपीट की आवाजें सुनाई देती हैं। उनकी चीख सुनाई देती हैं। कुछ लड़कियां हमारे दरवाजे पर बैठती थीं, इसलिए हमने CCTV लगाया है। प्यार का जाल, जिसने जिंदगी बदल दी एक अन्य पीड़िता ने बताया, मैं एक सामान्य परिवार की लड़की हूं। 8 महीने पहले एक दिन मैं सोशल मीडिया पर नौकरी की तलाश कर रही थी। तभी मेरी जिंदगी में सोनू नाम का एक लड़का आया। शुरुआत दोस्ती से हुई, फिर बातचीत बढ़ी और धीरे-धीरे यह रिश्ता प्यार में बदल गया। सोनू ने मुझे भरोसा दिलाया कि वह मुझसे शादी करेगा। मुझे बेहतर जिंदगी देगा। मैं उसकी बातों में आ गई और उस पर भरोसा कर लिया। मुझे लगा कि एक अच्छा जीवनसाथी मिल गया है, लेकिन मैं नहीं जानती थी कि यह प्यार नहीं, बल्कि एक ऐसा जाल है, जिसमें फंसकर मेरी पूरी जिंदगी बर्बाद होने वाली है। शादी के नाम पर कैद की शुरुआत 6 महीने पहले सोनू ने मुझसे शादी का वादा कर मुंगेर से किशनगंज के लिए ट्रेन का टिकट कर दिया। मैं ट्रेन में बैठकर किशनगंज आ गई। शुरू में उसने मुझे रेड लाइट एरिया से 500 मीटर की दूरी पर एक कमरे में रखा। मुझे सब कुछ नॉर्मल लगा। वो सुबह 9 बजे काम पर जाता और शाम 6 बजे घर आ जाता। एक महीने तक सब कुछ ठीक चला। इसके बाद एक दिन उसने मुझे एक अंधेरे कमरे में बंद कर दिया। कहा यहां से निकलना मत मैं 2-3 दिनों में वापस आता हूं। इस बीच जब मैं बाहर जाने की कोशिश की, तो उसने मुझे रोक दिया। हर सवाल का जवाब सिर्फ इतना होता तुम्हें यहीं रहना है। धीरे-धीरे मुझे एहसास होने लगा कि मैं अब कैद हो गई हूं। मुन्नी बेगम बोली- हर घंटे लाखों कमा सकते हैं पीड़िता ने आगे बताया, 2-3 दिन तक कमरे में कैद रहने के बाद एक दिन कमरे का दरवाजा खुला। जैसे ही मैंने नजर उठाकर देखा सामने एक महिला खड़ी थी। उसने अपना नाम मुन्नी बेगम बताया। उसने मुझे देखते ही सोनू से कहा, ‘ये लड़की बहुत खूबसूरत है। इसके जिस्म से हमलोग हर घंटे लाखों रुपए कमा सकते हैं, इसे धंधे में बैठा दो।’ इस दौरान मुझे पता चला कि मुझे सेक्स रैकेट गिरोह ने फंसाया है। मैंने सोनू से बहुत विनती की मुझे जाने दो, मैं ये सब काम नहीं करूंगी। मुन्नी बेगम के हाथ-पैर जोड़े लेकिन उनलोगों ने मुझे नहीं बख्शा। मुझे जबरदस्ती देह व्यापार में धकेल दिया। जब वो लोग पहले कस्टमर के पास भेजने वाले थे तो मैंने जाने से मना कर दिया। इसपर सोनू-मुन्नी ने मेरे साथ खूब मारपीट की। इसके बाद हर चोट पर उनलोगों ने मेकअप कर मुझे अश्लील कपड़े पहनाए। फिर एक ई-रिक्शा में बैठाकर NH पर छोड़ा। वहां से एक बस में बैठाकर सिलीगुड़ी भेजा। नशीली दवाएं-इंजेक्शन से खत्म किया जाता था विरोध शक्ति धीरे-धीरे मुझे समझ आ गया कि अब मेरे पास कोई रास्ता नहीं है। मुझे VIP ट्रीटमेंट के नाम पर अलग-अलग जगहों पर भेजा जाने लगा, लेकिन उससे पहले मुझे नशीली दवाइयां दी जाती थीं। कई बार इंजेक्शन भी लगाया जाता था, ताकि मैं विरोध न कर सकूं। इस हालत में मुझे कुछ समझ नहीं आता था। एक दिन मुझे इंजेक्शन दिया गया, जिसके बाद मेरी हालत बेहद खराब हो गई। मुझे लगातार उल्टियां होने लगीं। शरीर जवाब देने लगा। यहां तक कि मेरे प्राइवेट पार्ट से खून भी निकल रहा था। इस दौरान मैं दर्द से तड़प रही थी, लेकिन मुन्नी-सोनू ने मुझे अस्पताल नहीं पहुंचाया। वोलोग एक स्थानीय डॉक्टर को उसी रेड लाइट एरिया में बुला लिए और वहीं पर इलाज किया। भागने की कोशिश की, लेकिन पकड़ा गई एक दिन मैंने हिम्मत जुटाई और वहां से भागने की कोशिश की। मैंने बाथरूम के जरिए बने वेंटिलेटर से भागने की कोशिश की, लेकिन खगड़ा मेला गेट तक पहुंचते ही उनलोगों ने मुझे पकड़ लिया। इसके बाद वो लोग मुझे रस्सी से बांधकर खूब पीटे। चमड़े के बेल्ट से बुरी तरह पीटा गया। जब-जब मैं चिल्लाती मेरा मुंह दबा देते थे। वो लोग मुझे कहते तुम चिल्लाओगी तो भी कोई तुम्हें बचाने नहीं आएगा। इतना होने के बावजूद उनलोगों ने जबरन कई ग्राहकों के पास मुझे भेज दिया। आजादी से पहले से है खगड़ा रेड लाइट एरिया किशनगंज रेलवे स्टेशन से महज दो किलोमीटर दूर खगड़ा रेड लाइट एरिया की शुरुआत 1883 में खगड़ा पशु मेले के साथ हुई। स्थानीय लोगों के मुताबिक, खगड़ा के नवाब सैयद अता हुसैन खान ने इस मेले की शुरुआत की थी, जो सोनपुर मेले के बाद एशिया का दूसरा सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है। उस समय चीन, नेपाल, बंगाल और पूर्वी भारत के व्यापारी पशु खरीदने के लिए यहां आते थे। इन व्यापारियों के मनोरंजन के लिए नाच-गाने का इंतजाम किया जाता था। बिहार, बंगाल, नेपाल और असम से लड़कियां और औरतें यहां लाई जाती थीं। कुछ औरतें मेले के बाद वापस चली जाती थीं, लेकिन कई यहीं बस गईं। इन बसी हुई औरतों ने मेले के समय नाच-गाना और बाकी समय देह व्यापार शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह इलाका एक स्थायी रेड लाइट एरिया में बदल गया। 6 महीने पहले भागी थी नाबालिग लड़की बता दें कि 6 महीने पहले भी खगड़ा रेड लाइट एरिया से एक 15 साल की नाबालिग लड़की वॉशरूम के बहाने भाग निकली थी। वो रेड लाइट से खगड़ा के पासवान टोला में एक घर में छिप गई थी। इसके बाद गांववालों की सूचना पर किशनगंज टाउन थाना मौके पर पहुंची और नाबालिग का रेस्क्यू किया। साथ ही रेड लाइट एरिया की सरगना मुन्नी देवी और उसके परिवार वालों के खिलाफ लिखित शिकायत भी दर्ज की थी। इस घटना से जुड़ी इन खबरों को पढ़िए… ‘जो धंधे में नई लड़की, उसका रेट 15 हजार’:किशनगंज रेड लाइट एरिया से भागी नाबालिग, बोली-नशीली दवा देकर 25 आदमियों के पास भेजा ‘रोज लड़कियां लाई जाती हैं इसलिए CCTV लगाया’:किशनगंज में लड़कियों का वीडियो वायरल; देह व्यापार का दावा, डीएम बोले- जानकारी नहीं किशनगंज में रात में देह व्यापार के लिए जातीं लड़कियां,VIDEO:लोग बोले- अलग-अलग जगहों से नाबालिगों को लाते हैं, यहां से दूसरे राज्यों में भेजते हैं
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