
Uttarakhand Rain Alert: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते अलकनंदा नदी ने फिर एक बार रौद्र रूप ले लिया है। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। जिससे नदी किनारे लगी भगवान शिव की विशाल प्रतिमा पूरी तरह पानी में डूब गई है, घाट भी पूरी तरह जलमग्न नजर आ रहे हैं।
नदी तट से करीब 20-25 मीटर दूर लगी शिव प्रतिमा अब दिखाई नहीं दे रही। एक दिन पहले तक ये साफ नजर आ रही थी, लेकिन अब नदी अपने सामान्य रास्ते से कई मीटर बाहर फैल गई है। चारों तरफ पानी का सैलाब है। यह नजारा नदी के बढ़ते खतरे को साफ दिखा रहा है।
‘नदी के जलस्तर पर रखें नजर’- आपदा प्रबंधन अधिकारी
जिला प्रशासन ने नदी किनारे जाने पर रोक लगा दी है। बेलनी क्षेत्र समेत आसपास के इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने अपील की है कि रात में नदी के जलस्तर पर नजर रखें, वहीं स्थानीय लोगों को भी सतर्क रहने के लिए कहा गया है, इसके अलावा अनावश्यक रूप से नदी किनारे ना जाने की सलाह दी जा रही है। वहीं अगर कोई भी आपात स्थिति हो तो तुरंत प्रशासन को बताए ये भी अपील की जा रही है।
वहीं, उत्तराखंड पुलिस ने पोस्ट कर लिखा- ‘मौसम विभाग ने आज और कल भारी बारिश का ऑरेंज/येलो अलर्ट जारी किया गया है। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा है इसलिए बिना मार्ग की सटीक जानकारी लिए सफर पर न निकलें। कृपया सावधानी बरतें और किसी भी आपात स्थिति में 112 पर संपर्क करें।’
बारिश का असर त्रियुगीनारायण मंदिर के रास्ते पर भी पड़ा है। मोटरमार्ग कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो गया। विवाह के लिए आए दूल्हा-दुल्हन और बारातियों को वाहन छोड़कर पैदल ही मंदिर पहुंचना पड़ा। त्रियुगीनारायण भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह स्थल के रूप में मशहूर है। इस बार मौसम ने श्रद्धालुओं को परेशानी में डाल दिया।
गंगानगर के पास सड़क का एक हिस्सा टूटने से विजयनगर-तैला मोटरमार्ग पूरी तरह बंद हो गया। ग्रामीणों और यात्रियों को वैकल्पिक रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। लोक निर्माण विभाग की टीमें मरम्मत में जुटी हैं।
अच्छी बात ये है कि केदारनाथ धाम की यात्रा फिलहाल बिना किसी रुकावट के चल रही है। प्रशासन यात्रियों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रख रहा है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में भी भारी बारिश की संभावना जताई है। अफवाहों से बचने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।
उत्तराखंड में हर मानसून में नदियों का जलस्तर बढ़ने की घटनाएं देखने को मिलती है। लेकिन इस बार प्रशासन की तुरंत सतर्कता और लोगों की जागरूकता से बड़ी मुसीबत टल रही है। हिमालयी क्षेत्रों में बेहतर आपदा प्रबंधन और पहले से तैयारी की जरूरत हमेशा रहती है। फिलहाल चारधाम यात्रा प्रभावित नहीं हुई। वहीं, स्थानीय लोग और प्रशासन मिलकर इस चुनौती का सामना कर रहे हैं। यात्रियों को भी सलाह दी जा रही है कि बारिश के दौरान रास्तों पर ज्यादा सावधानी बरतें।