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PMCH Patna Protest | Outsourcing Workers Demand Salary Hike & Reinstatement


पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) के मेन गेट पर आउटसोर्स कर्मियों ने गुरुवार को प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने करीब 20 बर्खास्त कर्मियों को काम पर वापस लेने, वेतन बढ़ाने और श्रम कानून लागू करने की मांग की।

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कर्मचारियों ने अस्पताल प्रबंधन और आउटसोर्सिंग एजेंसी के खिलाफ नाराजगी जताई। उनका कहना है कि लंबे समय से काम करने के बावजूद वेतन नहीं बढ़ा। मांग उठाने वाले कुछ कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया।

कर्मचारियों के मुताबिक, करीब 4 महीने पहले उन्होंने 3 महीने का बकाया वेतन देने की मांग को लेकर PMCH परिसर में प्रदर्शन किया था। इसके बाद करीब 20 आउटसोर्स वार्ड कर्मियों को नौकरी से हटा दिया गया। कर्मियों को वापस लेने की मांग की।

PMCH आउटसोर्स वर्कर्स संघर्ष मोर्चा (AICCTU-ऐक्टू) के बैनर तले प्रदर्शन किया गया।

PMCH के मेन गेट पर किया प्रदर्शनष

PMCH के मेन गेट पर किया प्रदर्शनष

हमें जिनती सैलरी मिलती, वो न्यूनतम वेतन से भी कम

प्रदर्शन में शामिल महिला कर्मचारी मनस्वी कुमारी ने बताया कि वे कई साल से अस्पताल में काम कर रही हूं। इसके बावजूद हर महीने 8 हजार रुपए वेतन मिलता है। यह न्यूनतम मजदूरी से भी कम है।

मनस्वी ने कहा कि चार-पांच महीने तक वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों को आर्थिक परेशानी होती है। किराए के मकान में रहने और परिवार चलाने वाले कर्मचारियों को खर्च के लिए कर्ज लेना पड़ता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि वेतन की मांग को लेकर प्रदर्शन के बाद आवाज उठाने वाले कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया।

वेतन बढ़ाने की उठाई मांग।

वेतन बढ़ाने की उठाई मांग।

श्रम कानून लागू करने की मांग

ऐक्टू के महासचिव रणविजय कुमार ने कहा कि पीएमसीएच में आउटसोर्सिंग कर्मियों से कम वेतन पर काम कराया जा रहा है। कर्मचारियों को उनके श्रम के अनुरूप भुगतान नहीं किया जा रहा और श्रम कानूनों का भी पालन नहीं हो रहा है।

उन्होंने मांग की कि बर्खास्त किए गए सभी 20 कर्मचारियों को अविलंब वापस काम पर रखा जाए। सभी आउटसोर्सिंग कर्मियों के वेतन में वृद्धि की जाए और अस्पताल में श्रम कानूनों को सख्ती से लागू किया जाए। आंदोलन तेज करने की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कर्मचारियों के साथ तानाशाही रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब तक बर्खास्त कर्मियों की बहाली, बकाया वेतन भुगतान और श्रम कानूनों के पालन की मांग पूरी नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।



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