
Meta CEO Mark Zuckerberg Apologise to indian government: भारतीय संसद की स्थायी समिति की चेतावनी के बाद Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से माफी मांग ली है। आपको बता दें कि पीएम मोदी के एक फेसबुक वीडियो को कुछ समय के लिए हटाए जाने को लेकर संसद की स्थायी समिति ने मार्क जुकरबर्ग से तीन दिन के भीतर व्यक्तिगत माफी मांगने को कहा था। समिति ने चेतावनी दी थी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है। जुकरबर्ग ने अपनी गलतियों पर खेद व्यक्त किया है।
उन्हें यह साफ कर दिया गया कि वे इंटरमीडियरी डेफिनिशन के तहत नहीं आते हैं। वे चुनते हैं कि कंटेंट किसे मिलेगा। IT एक्ट के तहत सेफ हार्बर लागू नहीं होता। उन्होंने माना कि कुछ खास तरह के कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए बहुत सारा पैसा दिया गया था। उन्होंने माफी मांगी और गलती पर अफसोस जताया है। मार्क जकरबर्ग ने चाइल्ड सेक्सुअल अब्यूज़ मटीरियल (CSAM) कंटेंट, डीपफेक कंटेंट और प्लेटफॉर्म चलाने में हुई गलतियों के लिए माफी मांगी।
सरकारी अधिकारियों ने यह भी बताया कि मेटा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के तहत इंटरमीडियरी (मध्यस्थ) को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता, क्योंकि इसके एल्गोरिदम सक्रिय रूप से यह तय करते हैं कि कौन सा कंटेंट आगे बढ़ाया जाएगा और यूजर्स को दिखाया जाएगा।
‘नहीं मिलेगी सेफ हार्बर सुरक्षा’
सरकारी अधिकारियों ने मेटा को स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह आईटी अधिनियम के तहत इंटरमीडियरी की परिभाषा के दायरे में नहीं आती है। चूंकि मेटा के एल्गोरिदम तय करते हैं कि कौन सा कंटेंट किसे दिखेगा। इसलिए IT अधिनियम के तहत ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा लागू नहीं होती है, उसे कानूनी सेफ हार्बर सुरक्षा का लाभ नहीं दिया जाएगा।
बातचीत में प्लेटफॉर्म के बिजनेस तौर-तरीकों पर भी चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, मेटा ने माना कि कंटेंट की कुछ कैटेगरी को बढ़ावा देने पर काफी पैसा खर्च किया गया था और और इस फैसले पर खेद व्यक्त किया। कंपनी ने पूछताछ और समीक्षा के दौरान स्वीकार किया कि एक विशेष प्रकार के कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए बहुत सारा पैसा दिया गया था। इस गलती को स्वीकार करते हुए कंपनी और जुकरबर्ग ने अपनी इस चूक पर खेद जताया है।
बाल सुरक्षा आयोग ने मेटा को भेजा था नोटिस
इससे पहले राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने 3 जुलाई, 2026 को मेटा को एक नोटिस जारी किया था। इसमें एक मीडिया रिपोर्ट पर खुद से संज्ञान लिया गया था। रिपोर्ट में चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेटिव एंड अब्यूज मटीरियल (CSEAM) से जुड़े कथित विज्ञापनों के बारे में बताया गया था। NCPCR ने इस मामले में मेटा से जवाब मांगा था। इसके जवाब में, मेटा ने एक हफ्ते बाद अपना जवाब दिया। इसके बाद आयोग ने कहा था कि इस मामले के खिलाफ जांच के रास्ते तलाशेगी।