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आजम खान के जौहर यूनिवर्सिटी के अंदर बनी सड़क आम रास्ता घोषित में से कमरे तोड़ने के आदेश चलेगा बुलडोजर…



समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। रामपुर में स्थित उनकी मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के ध्वस्तीकरण को लेकर बड़ा आदेश जारी किया गया है। रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने इसे लेकर नोटिस जारी किया है। RDA ने कथित तौर पर बिना मंजूरी के बनी 38 इमारतों को हटाने का आदेश दिया है।

रामपुर विकास प्राधिकरण ने आजम खान के जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में बनी कुल 40 प्रमुख इमारतों की जांच की। जांच में सामने आया कि इनमें से सिर्फ दो इमारतें, मेडिकल कॉलेज और अकादमिक ब्लॉक के निर्माण का नक्शा स्वीकृत था। बाकी 38 इमारतें बिना किसी स्वीकृत नक्शे या निर्माण अनुमति के ही बना दिए गए। इसके इन इमारतों को अवैध मानते हुए इस हटाने का आदेश जारी किया गया है।

पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) ने यूनिवर्सिटी कैंपस के अंदर एक सड़क पर बोर्ड लगाकर इसे आम लोगों के इस्तेमाल के लिए सार्वजनिक रास्ता घोषित कर दिया है। RDA ने यूनिवर्सिटी चलाने वाले जौहर ट्रस्ट को 28 जून को नोटिस जारी कर आरोप लगाया था कि कैंपस के अंदर 82,309.80 वर्ग मीटर का निर्माण गैर-कानूनी तरीके से किया गया था। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन के तर्क खारिज कर दिए गए हैं, अब 15 दिन की मोहलत दी गई है।

40 में से 38 कमरे बिना नक्शा का बनाया गया

अथॉरिटी के मुताबिक, 38 ब्लॉक बिल्डिंग के नक्शों की मंजूरी लिए बिना बनाए गए थे, जबकि सिर्फ दो इमारतें ही जिला पंचायत से मंजूरी लेने के बाद बनाई गई थीं। अथॉरिटी ने कहा कि जौहर ट्रस्ट के सेक्रेटरी तय समय के अंदर इमारतों के निर्माण से जुड़ा कोई सबूत या मंजूरी नहीं दिखा पाए। अब उसने ट्रस्ट को 38 इमारतों को हटाने के लिए 15 दिन का और समय दिया है और चेतावनी दी है कि अगर तय समय में ये इमारतें नहीं हटाई गईं, तो उन्हें गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

यह आदेश रामपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी के वाइस चेयरमैन ने दिया है, जो रामपुर के जिला मजिस्ट्रेट भी हैं। यह आदेश उत्तर प्रदेश शहरी योजना और विकास अधिनियम, 1973 के प्रावधानों के तहत दिया गया है। बता दें कि यह यूनिवर्सिटी आजम खान का प्रमुख प्रोजेक्ट है। फिलहाल वोरामपुर जेल में बंद हैं। 

मई में, रामपुर की एक अदालत ने खान को दो साल की साधारण कैद की सजा सुनाई थी और 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया था। यह सजा 2019 के एक मामले में सुनाई गई थी, जो लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान जिला प्रशासन के अधिकारियों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने से जुड़ा था।



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