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बिहार पुलिस को मिले नए सिपाही बेगूसराय में पासिंग आउट परेड बोले यह नौकरी नहीं समाज सेवा है…




बिहार पुलिस की टीम में आज 241 नए जांबाज सिपाही शामिल हो गए हैं। बेगूसराय पुलिस लाइन में आयोजित पासिंग आउट और दीक्षांत समारोह के साथ ही 2025 बैच के इन सिपाहियों की ट्रेनिंग सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। ट्रेनिंग पूरा होने के बाद सभी नव-प्रशिक्षित सिपाही इस ऐतिहासिक पासिंग आउट परेड का हिस्सा बने। पूरी निष्ठा से देश और समाज की सेवा करने की शपथ ली। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बेगूसराय रेंज के डीआईजी (DIG) शैलेश कुमार सिन्हा शामिल हुए। उनके साथ एसपी मनीष, मुख्यालय डीएसपी निखिल कुमार, सदर-वन डीएसपी आनंद कुमार पांडेय, साइबर डीएसपी इमरान अहमद सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। यह केवल नौकरी नहीं, समाज सेवा का माध्यम है परेड की सलामी लेने के बाद नव-प्रशिक्षित सिपाहियों को संबोधित करते हुए डीआईजी शैलेश कुमार सिन्हा ने प्रेरणादायक बातें कही। उन्होंने कहा कि पुलिस का काम सिर्फ नौकरी करना नहीं है। यह एक साधारण नौकरी नहीं है। यह सीधे तौर पर समाज की सेवा है। हम सभी को मिलकर समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सेवा करनी है। जब यह जवान प्रशिक्षण के लिए आए थे, तब एक सामान्य नागरिक की हैसियत से आए थे। लेकिन आज प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन्हें खाकी वर्दी के रूप में एक विशिष्ट पहचान मिली है। इस वर्दी के साथ जहां एक ओर कानून की अपार शक्ति प्राप्त हुई है, वहीं दूसरी ओर समाज के प्रति दायित्व और जिम्मेदारी भी दोगुनी हो गई है। आम जनता के साथ करें मित्रवत व्यवहार डीआईजी ने जवानों को संदेश देते हुए कहा कि आम लोगों को मदद करने का जितना अवसर पुलिस विभाग में मिलता है, उतना किसी अन्य सेवा में नहीं मिलता। चाहे कोई रास्ते में बीमार पड़ा हो, सड़क पर चल रहा हो या किसी के साथ कोई अप्रिय घटना घटी हो, पुलिस को हर जगह उनकी मदद के लिए तत्पर रहना होगा। यदि रास्ते में कोई असहाय या बीमार व्यक्ति मिले, तो उसे अस्पताल पहुंचाना और उसका इलाज कराना पुलिस का परम कर्तव्य है। इसके साथ ही जवानों को अपना मानवीय चरित्र हमेशा बनाए रखना होगा। जो लोग कानून का पालन करते हैं, उनके साथ पुलिस को पूरी तरह से मित्रवत (दोस्ताना) व्यवहार करना होगा और कंधे से कंधा मिलाकर चलना होगा। कानून का पालन करने से मिलेगा नैतिक अधिकार डीआईजी ने कहा कि जो लोग कानून का उल्लंघन करते हैं या कानून तोड़ते हैं, उनके खिलाफ कानून के दायरे में रहकर पूरी सख्ती से कार्रवाई करनी है। कभी भी यह अहंकार या घमंड नहीं आना चाहिए कि उनके पास वर्दी है, बहुत पावर है या बहुत शक्ति है तो वे कुछ भी कर सकते हैं। देश का कानून आम लोगों के साथ-साथ पुलिस पर भी समान रूप से लागू होता है। इसलिए जब आप समाज में कानून का पालन कराने जा रहे हैं, तो यह अनिवार्य है कि आप खुद भी कानून के दायरे में रहें और किसी भी गैर-कानूनी काम से दूर रहें। जब आप स्वयं अनुशासित रहेंगे और कानून का पालन करेंगे, तभी आपको दूसरों को कानून का पाठ पढ़ाने का नैतिक अधिकार (Moral Authority) प्राप्त होगा। विभिन्न इकाइयों और जिलों में होगी तैनाती डीआईजी शैलेश कुमार सिन्हा ने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले ये 241 सिपाही बिहार पुलिस की विभिन्न इकाइयों से आए थे। जिसमें पटना जिला कंट्रोल रूम और ईआरएसएस (ERSS – Emergency Response Support System) जैसी महत्वपूर्ण इकाइयां शामिल हैं। कठिन प्रशिक्षण के दौरान इन जवानों को पुलिसिंग के हर गुर सीखे हैं। आधुनिक हथियारों का संचालन, साइबर अपराध से निपटने, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और वीआईपी सुरक्षा के साथ-साथ भीड़ नियंत्रण के तरीके सिखाए गए हैं। अब ये सभी सिपाही पूरी तरह से तैयार होकर अपनी-अपनी आवंटित इकाइयों और जिलों में वापस लौटेंगे। जहां देश सेवा और नागरिक सुरक्षा के अपने कर्तव्यों पर मुस्तैदी से तैनात होंगे।



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