
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया है। राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में भूपेंद्र चौधरी, मनोज पांडे समेत छह नए नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। साथ ही दो मौजूदा राज्यमंत्री को कैबिनेट मंत्री बनाते हुए प्रमोशन दिया गया। इस मंत्रिमंडल विस्तार में BJP ने सपा के PDA फॉर्मूले का काट निकालने की कोशिश की है और बहुत हद तक पार्टी इसमें कामयाब होती भी नजर आ रही है।
बीजेपी इस कैबिनेट विस्तार को 2027 के चुनावी रणनीति से जोड़कर देख रही है। यही वजह है कि इस बार सबसे ज्यादा ध्यान जातीय और सामाजिक समीकरणों पर दिया गया है। माना जा रहा है कि भाजपा ने समाजवादी पार्टी के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले का मुकाबला करने के लिए इस रूपरेखा को तैयार किया है।
नए मंत्रियों में शामिल चेहरों का चयन ऐसे किया गया है जो विभिन्न वर्गों तक राजनीतिक संदेश पहुंचा सकें।
सीएम योगी ने इस बार पिछड़े और दलित वर्ग पर विशेष जोर दिखाया है। भाजपा का मानना है कि 2024 लोकसभा चुनाव में पिछड़े और दलित वोटों का एक हिस्सा सपा-कांग्रेस गठबंधन की ओर चला गया था। अब पार्टी इन्हीं वोटबैंकों को दोबारा अपने पाले में लाने की रणनीति पर काम कर रही है। खासतौर पर गैर-यादव पिछड़ों और दलित वोटरों में अपनी पकड़ को और मजबूत करने पर फोकस है।
मनोज पांडे समेत कई नेता जो हाल ही में समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा के करीब आए हैं, उन्हें कैबिनेट में जगह देकर पार्टी ने विपक्ष के PDA समीकरण को कमजोर करने की कोशिश की है। इस विस्तार के बाद योगी मंत्रिमंडल में मंत्रियों की कुल संख्या अब 60 हो गई है। योगी सरकार अब पूरे दमखम के साथ 2027 के चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में जुट गई है।