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साल बाद तेजाब कांड में आया फैसला मोतिहारी में बड़े भाई को उम्रकैद जमीन विवाद में भाभी समेत पर किया था एसिड अटैक…




पूर्वी चंपारण जिले के घोड़ासहन थाना क्षेत्र में वर्ष 2014 में हुए चर्चित तेजाब कांड में 12 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। सत्र न्यायाधीश-21 रमेश रंजन की अदालत ने आरोपी विजय राय को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। फैसला सुनाए जाने के बाद अदालत में मौजूद आरोपी भावुक हो गया और उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े। पुश्तैनी जमीन के विवाद से शुरू हुआ था मामला मामला घोड़ासहन थाना कांड संख्या-56/14 से जुड़ा है। पीड़ित अभय कुमार यादव ने बताया कि वर्ष 2008 में उनके पिता ने पुश्तैनी जमीन का बंटवारा तीनों भाइयों के बीच कर दिया था। सभी को करीब एक-एक बीघा जमीन मिली थी। अभय का आरोप है कि बड़े भाई विजय राय लगातार अपने हिस्से की जमीन उनके नाम कराने का दबाव बना रहे थे। जब उन्होंने इससे इनकार किया तो आरोपी ने अपने साला, ससुर और पत्नी के साथ मिलकर साजिश रची। पत्नी पर फेंका तेजाब, बचाने आए तीन अन्य भी झुलसे पीड़ित के अनुसार, साजिश के तहत आरोपी ने उनकी पत्नी पर तेजाब फेंक दिया। पत्नी की चीख-पुकार सुनकर बीच वाले भाई की पत्नी रेणु देवी और उनके बच्चे बचाने के लिए दौड़े, लेकिन उन पर भी तेजाब डाल दिया गया। इस हमले में कुल चार लोग गंभीर रूप से झुलस गए। पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के दौरान आरोपी ने गोली चलाने की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सका। सभी घायलों को तत्काल सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज किया गया। 12 साल तक चली सुनवाई घटना के बाद पीड़ित पक्ष की शिकायत पर घोड़ासहन थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस जांच पूरी होने के बाद मामला सत्र न्यायालय पहुंचा, जहां करीब 12 वर्षों तक सुनवाई चली। इस दौरान दोनों पक्षों ने अदालत के समक्ष अपने-अपने तर्क और साक्ष्य प्रस्तुत किए। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता पप्पू सिंह ने बताया कि अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयान का गहन परीक्षण करने के बाद आरोपी विजय राय को दोषी माना। पीड़ित परिवार ने ली राहत की सांस सत्र न्यायाधीश-21 रमेश रंजन की अदालत ने सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विजय राय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली और कहा कि उन्हें लंबे इंतजार के बाद न्याय मिला है। वहीं, इस फैसले को तेजाब हमले जैसे जघन्य अपराधों के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अदालत के इस निर्णय से ऐसे मामलों में पीड़ितों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।



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