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सिपाही भर्ती परीक्षा में हाईटेक सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ गिरफ्तार माइक्रोफोन से भेजेते सवाल इयरबड से मिलते थे जवाब लाख में हुई थी…




मुजफ्फरपुर में आयोजित सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान ब्लूटूथ इयरबड, माइक्रोफोन और अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए नकल कराने वाले एक हाईटेक सॉल्वर गैंग का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें दो अभ्यर्थी और दो सॉल्वर शामिल हैं। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने के नाम पर 10 लाख रुपये तक का सौदा करता था और इसके लिए पूरी तरह तकनीक आधारित नेटवर्क तैयार किया गया था। पूरे मामले का खुलासा सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी ने सोमवार को प्रेस वार्ता के दौरान किया। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह एक संगठित अंतरजिला गिरोह का मामला सामने आया है, जिसके तार भोजपुर से लेकर पटना तक जुड़े हुए हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। परीक्षा केंद्र से पकड़ा गया अभ्यर्थी, खुली परत-दर-परत साजिश 14 जून को केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) की लिखित परीक्षा के दौरान मिठनपुरा थाना क्षेत्र स्थित चैपमैन राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय परीक्षा केंद्र पर एक परीक्षार्थी की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। जांच के दौरान उसके पास से माइक्रोफोन, ब्लूटूथ इयरबड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक संचार उपकरण बरामद किए गए। गिरफ्तार अभ्यर्थी की पहचान भोजपुर जिले के शाहपुर निवासी पंकज कुमार यादव के रूप में हुई। पूछताछ में उसने कई अहम जानकारियां दीं। उसकी निशानदेही पर सिकंदरपुर स्थित राधाकृष्ण केडी स्कूल परीक्षा केंद्र से दूसरे अभ्यर्थी प्रकाश कुमार को गिरफ्तार किया गया। दोनों की गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा हो गया। ऐसे काम करता था हाईटेक नकल गैंग पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह ने परीक्षा में कदाचार कराने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया था। पंकज कुमार यादव परीक्षा हॉल के अंदर बैठकर माइक्रोफोन के जरिए प्रश्नों को बाहर मौजूद गिरोह के सदस्यों तक पहुंचाता था। बाहर बैठे सॉल्वर उन प्रश्नों के उत्तर तैयार करते और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से वापस परीक्षा कक्ष में भेजते थे। परीक्षा हॉल के अंदर मौजूद अभ्यर्थी ब्लूटूथ इयरबड के जरिए उत्तर सुनते और उन्हें अपनी उत्तर पुस्तिका में लिखते थे। पुलिस का मानना है कि गिरोह इसी तरीके से कई अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की तैयारी में था। 10 लाख में पास कराने का हुआ था सौदा जांच में यह भी सामने आया है कि मद्य निषेध सिपाही भर्ती परीक्षा का फॉर्म निकलने के कुछ दिनों बाद पंकज कुमार यादव की मुलाकात संजय कुमार सिंह उर्फ रंजन सिंह से हुई थी। संजय ने खुद को विभिन्न सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं में ‘सेटिंग’ कराने वाला बताकर दोनों अभ्यर्थियों का भरोसा जीता था। इसके बाद पंकज ने अपने साथी प्रकाश कुमार को भी इस नेटवर्क से जोड़ा। पुलिस के अनुसार दोनों अभ्यर्थियों को परीक्षा पास कराने के लिए 10 लाख रुपये में सौदा तय किया गया था। समझौते के तहत पांच लाख रुपये पहले और पांच लाख रुपये सफलता मिलने के बाद देने थे। आरोपियों ने अभ्यर्थियों को इस पूरे खेल को गोपनीय रखने की भी हिदायत दी थी। पटना से दबोचे गए सॉल्वर गैंग के सदस्य मामले की गंभीरता को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। तकनीकी विश्लेषण और पूछताछ के आधार पर पुलिस ने पटना के बिहटा में छापेमारी कर संजय कुमार सिंह उर्फ रंजन सिंह और पवन कुमार को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार संजय कुमार सिंह इस पूरे नेटवर्क का अहम सदस्य था। उसी ने नकल कराने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे विशेष इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और माइक्रोफोन उपलब्ध कराए थे। उसके मोबाइल और अन्य उपकरणों की जांच की जा रही है। कई जिलों तक फैला हो सकता है नेटवर्क पूछताछ में पुलिस को कई अन्य लोगों के नाम भी मिले हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि गिरोह का नेटवर्क मुजफ्फरपुर, भोजपुर, पटना समेत कई अन्य जिलों तक फैला हो सकता है। कुछ ऐसे लोगों की भी भूमिका सामने आई है, जिन्होंने आरोपियों को ठहराने और नेटवर्क संचालित करने में मदद की थी। पुलिस लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है। जांच के घेरे में परीक्षा केंद्र की सुरक्षा व्यवस्था पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद ब्लूटूथ इयरबड, माइक्रोफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण परीक्षा केंद्र के अंदर कैसे पहुंच गए। परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा जांच में कहीं कोई चूक हुई या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जा रही है। सिटी एसपी ने कहा कि इस मामले में जो भी व्यक्ति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता से समझौता करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। ये सामान हुए बरामद पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से तीन मोबाइल फोन, दो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, एक ब्लूटूथ इयरबड, दो आधार कार्ड, दो प्रवेश पत्र, एक ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं। बरामद उपकरणों की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच कराई जा रही है, जिससे गिरोह के पूरे नेटवर्क और उसके काम करने के तरीके का पता लगाया जा सके।



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