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लातेहार के चंदवा प्रखंड के हेसला गांव में बुनियादी सुविधाओं का संकट ग्रामीणों का जीवन हुआ कठिन…

Latehar जिले के चंदवा प्रखंड अंतर्गत हेसला गांव इन दिनों बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी से जूझ रहा है। गांव के लोग आज भी सड़क, पानी, बिजली और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

हेसला गांव की सबसे बड़ी समस्या यहां की जर्जर सड़क है। गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने वाली करीब 3 किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क बरसात के दिनों में पूरी तरह दलदल में बदल जाती है। ऐसे में स्कूल जाने वाले बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार मरीजों को चारपाई पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है, जिससे समय पर इलाज नहीं मिल पाता।

पेयजल की समस्या भी गांव में गंभीर रूप ले चुकी है। गांव में केवल दो हैंडपंप हैं, जिनमें से एक महीनों से खराब पड़ा है। बाकी एक हैंडपंप से पूरे गांव के लोग पानी भरते हैं, जिससे सुबह और शाम लंबी कतारें लग जाती हैं। गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत और भी बढ़ जाती है, जिससे ग्रामीणों को दूर के कुओं और नालों का सहारा लेना पड़ता है।

बिजली की स्थिति भी बेहतर नहीं है। गांव में बिजली के खंभे तो लगे हैं, लेकिन आपूर्ति बेहद अनियमित है। कई बार 2-3 दिनों तक बिजली नहीं आती, जिससे बच्चों की पढ़ाई और किसानों के काम प्रभावित होते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली बिल तो नियमित आता है, लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं मिलता।

शिक्षा व्यवस्था की बात करें तो गांव का प्राथमिक विद्यालय भी बदहाल स्थिति में है। स्कूल भवन जर्जर हो चुका है और शिक्षकों की संख्या भी कम है। कई बार शिक्षक समय पर नहीं आते, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देना चाहते हैं, लेकिन गांव में सुविधाओं की कमी के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है।

स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल भी चिंताजनक है। गांव में कोई स्वास्थ्य केंद्र नहीं है और न ही कोई नियमित डॉक्टर आता है। छोटी-छोटी बीमारियों के लिए भी लोगों को चंदवा या जिला मुख्यालय जाना पड़ता है, जो गरीब परिवारों के लिए मुश्किल भरा होता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से कई बार सड़क निर्माण, हैंडपंप मरम्मत, बिजली आपूर्ति सुधार और स्वास्थ्य केंद्र की मांग की है, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि चुनाव के समय नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही सब भूल जाते हैं।

अब ग्रामीणों ने एकजुट होकर आंदोलन करने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे जिला प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।

यह स्थिति दर्शाती है कि आज भी कई गांव विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। सरकार की योजनाएं कागजों पर तो अच्छी लगती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। हेसला गांव के लोग अब उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी आवाज जल्द ही प्रशासन तक पहुंचेगी और उन्हें बुनियादी सुविधाएं मिल पाएंगी।

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