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भटक गया किसी ने पाला या फिर कुछ और बहू बेगम मकबरा परिसर में दिखा ऑस्ट्रेलियाई पक्षी उड़ नहीं सकता फिर कैसे पहुंचा…



धर्मनगरी अयोध्या इन दिनों केवल अपनी आध्यात्मिक आभा के लिए ही नहीं, बल्कि एक अनोखे ‘मेहमान’ की वजह से भी चर्चा में है। नवाबी वास्तुकला के बेजोड़ नमूने, बहू बेगम मकबरा परिसर में हाल ही में एक पक्षी को टहलते हुए देखा गया। भूरे रंग का, लंबी गर्दन और मजबूत पैरों वाला यह जीव कोई साधारण पक्षी नहीं, बल्कि सात समंदर पार ऑस्ट्रेलिया का मूल निवासी ‘इमू’ है। 

जैसे ही दुर्लभ पक्षी की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, स्थानीय लोगों और पर्यटकों के बीच एक ही सवाल गूंजने लगा कि ‘जो पक्षी उड़ नहीं सकता, वह ऑस्ट्रेलिया से अयोध्या कैसे पहुंच गया?’

इमू दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा पक्षी है । इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भारी शरीर और छोटे पंखों के कारण यह उड़ नहीं सकता। हालांकि, कुदरत ने इसे उड़ने की क्षमता नहीं दी, तो इसके बदले इसे बेमिसाल रफ्तार बख्शी है। एक वयस्क इमू लगभग 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है।

अयोध्या कैसे पहुंचा यह दुर्लभ पक्षी?

अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि कोई विदेशी पक्षी उड़कर या रास्ता भटक कर आया होगा, लेकिन इमू के मामले में थोड़ा अलग हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे अभी तक ये स्पष्ट नहीं हुआ है कि इमू पक्षी आखिर कैसे आया है। 
वन विभाग का कहना है कि इमू भारत की मूल पक्षी नहीं है, इसलिए यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित प्रजातियों की सूची में शामिल नहीं है। ऐसे में विदेशी यानी एक्जॉटिक जीवों के लिए अलग नियम बनाए गए हैं। जिनके तहत उनकी देशभाल और सुरक्षा की व्यवस्था की जाती है। फिलहाल विभाग नजर बनाए हुए हैं कि उन्हें किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।



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