![]()
पटना में अभी स्वच्छता सर्वेक्षण चल रहा है। पटना नगर निगम दावा कर रही है कि हर दिन 75 वार्डों में नियमित कचरे का उठाव हो रहा है, लेकिन कचरा उठाव व्यवस्था चरमराई हुई है। लंबे समय से नये वाहनों की खरीद न होने के कारण निगम के कुल 523 वाहनों में से केवल 327 ही चलने लायक बचे हैं, जबकि लगभग 37 प्रतिशत वाहन जर्जर हो चुके हैं। जंक्शन स्थित मल्टी लेवल पार्किंग के दूसरे फ्लोर पर लाइन से अधिकतर जर्जर वाहन रखा हुआ है। किसी की हेडलाइट फूटी हुई है, तो किसी का शीशा टूटा हुआ है। 75 वार्डों में औसतन हर पांच में से दो कचरा वाहन खराब पटना नगर निगम के सभी 75 वार्डों में औसतन हर पांच में से दो कचरा वाहन खराब पड़े हैं। शहर को कचरा उठाव के लिए 375 सेक्टरों में बांटा गया है, लेकिन मेंटेनेंस के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। साल 2025 के सितंबर में मिशन विश्वकर्मा के तहत और इस साल स्वच्छता सर्वेक्षण के नाम पर वाहनों की मरम्मत तो करायी गयी, लेकिन स्थिति जस की तस है। वार्ड 48 में ई-रिक्शा खराब होने की शिकायत वार्ड 48 के पार्षद इंद्रदीप चंद्रवंशी ने भी अपने वार्ड में ई-रिक्शा खराब होने की शिकायत की है। वार्ड 44 के पार्षद आशीष चंद्र ने बताया कि उनके वार्ड के दो सेक्टरों में वाहन खराब हैं। वर्तमान में वार्डों के सेक्टर का निर्धारण साल 2011 की जनसंख्या के आधार पर चल रहा है, जबकि अब तक आबादी में करीब 50.45% की बढ़ोतरी हो चुकी है। इस बढ़े हुए लोड के कारण मौजूदा संसाधनों पर दबाव बढ़ गया है। टूटी बॉडी वाली गाड़ियों से सड़कों पर कचरा गिरता रहता हाल ही में निगम बोर्ड की बैठक में पार्षदों ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया कि पांच में से दो जोन में कचरा उठाव पूरी तरह ठप है। वर्तमान में नूतन राजधानी और पाटलिपुत्र अंचल को 80-80 सेक्टरों में, अजीमाबाद और बांकीपुर को 60-60, कंकड़बाग को 55 और पटना सिटी अंचल को 40 सेक्टरों में बांटकर गाड़ियां तैनात की गयी हैं। बिना नंबर प्लेट और टूटी बॉडी वाली इन गाड़ियों से सड़कों पर कचरा गिरता रहता है, जिससे हर तरफ गंदगी फैल रही है। परिवहन विभाग की ओर से सर्वे में भी 152 कचरा वाहन को कंडम घोषित कर दिया गया है। इसकी बिक्री भी नहीं हो सकी है। हालांकि, 82 करोड़ रुपये में बेचने के लिए टेंडर निकाला गया था, पर किसी ने रुचि नहीं दिखाई। मंजूरी के बाद भी लटकी 375 नये वाहनों की खरीद कचरा संकट को दूर करने के लिए 15 दिसंबर को आयोजित 18वीं सशक्त स्थायी समिति की साधारण बैठक में नये वाहनों के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी थी। इसके तहत 375 नये कचरा वाहनों में 150 ई-रिक्शा, 150 क्लोज टिपर और 75 ओपन टिपर और 375 हाथ ठेलों की खरीद को स्वीकृति दी गयी थी। साथ ही दो सुपर सकर मशीन और तीन मिनी पोपलेन की खरीद भी पास हुई थी। योजना थी कि हर वार्ड में 5 नये ठेले देकर और 5 पुराने ठेलों की मरम्मत कर कुल 10-10 ठेले तैनात किये जाएं। लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण कागजों पर पास होने के बावजूद अब तक यह खरीदारी धरातल पर नहीं उतर सकी है। नई गाड़ियों के लिए टेंडर निकला हुआ निगम प्रशासन के मुताबिक, नई गाड़ियों के लिए टेंडर निकला हुआ है। अभी फिलहाल हर अंचल में वैकल्पिक व्यवस्था दी गई है। कंट्रोल रूम से कोऑर्डिनेशन किया जाता है और जिस अंचल में गाड़ी खराब है वहां दूसरे अंचल से गाड़ी को भेजा जाता है। कचरा उठाव नियमित हो रहा है। फिर भी लोगों को अगर कहीं शिकायत है तो वह हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर रहे हैं और उसका निष्पादन भी हो रहा है। खराब गाड़ियों को लेकर मुख्यालय में मीटिंग हुई थी, श जिसमें निर्देश दिया है गया था कि वर्कशॉप में सभी गाड़ियों को जल्द से जल्द ठीक कराया जाए। अगर वर्कशॉप में देरी हो रही है तो किसी प्राइवेट वर्कशॉप में भी जाकर ठीक करा सकते हैं।
Source link