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दिल्ली से हटेंगे सरकार में लगे लाखों कैमरे रेखा सरकार का आदेश आखिर क्या है वजह…



CCTV to be Remove in Delhi: दिल्ली में लगे हजारों सीसीटीवी कैमरों को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। इन्हें रिप्लेस करने का ऑर्डर आया है। बताया जा रहा है कि राजधानी में लगे लाखों कैमरों में से कई चीन की कंपनी के हैं। ऐसे में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारतीय जनता पार्टी इन कैमरों को बदलने की तैयारी शुरू करने जा रही है।

दिल्ली के कोने-कोने में इन सीसीटीवी कैमरों को आम आदमी पार्टी के कार्यकाल में लगाया गया था। इन कैमरों को सड़कों, कॉलोनी, मोहल्लों, गलियों से लेकर स्कूलों तक में लगाया गया था।

चरणबद्ध तरीके से हटाए जाएंगे CCTV

हालांकि, अब केंद्र शासित प्रदेश के PWD मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने बुधवार (1 अप्रैल) को बताया कि सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के तहत दिल्ली भर में लगाए गए करीब डेढ़ लाख चीनी कैमरों को हटा दिया जाएगा।

दिल्ली में कुल सीसीटीवी कैमरे

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली में कुल 2 लाख 74 हजार सीसीटीवी कैमरे हैं। इन्हें दो फेज में इंस्टॉल किया गया था। पहले चरण (सितंबर 2020 से नवंबर 2022 तक) में 1 लाख 40 हजार सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, जबकि दूसरे चरण (जून 2025 से मार्च 2026 तक) में 1 लाख 34 हजार कैमरे लगाए गए।  

सुरक्षा समझने में नाकाम रही AAP सरकार- BJP

ऐसे में बीजेपी सरकार का आरोप है कि AAP के कार्यकाल में लगे तकरीबन 1.40 लाख कैमरे चीनी कंपनी Hikvision के हैं। इस कंपनी पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेटा सुरक्षा और निगरानी को लेकर कई दफा सवाल उठ चुके हैं। ऐसे में व्यापक सुरक्षा चिंताओं और सरकारी निर्देशों के मद्देनजर इन कैमरों को बदलने का फैसला लिया गया है।

प्रवेश साहिब सिंह वर्मा का इस मुद्दे पर कहना है कि पिछली सरकार (AAP) ने तकनीकी व्यवस्था लाते वक्त सुरक्षा के दीर्घकालिक पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया। सीसीटीवी सिर्फ निगरानी का साधन नहीं है, बल्कि संवेदनशील डेटा से जुड़ा एक अहम सिस्टम भी है। उन्होंने तर्क दिया कि जब पूरे शहर में इतने बड़े पैमाने पर तकनीक लगाई जाती है तो यह सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा निर्णय होता है, जिसे गंभीरता से लेना चाहिए। लेकिन आम आदमी पार्टी की सरकार इस बात को समझ पाने में नाकाम रही।

पहले चरण में हटाए जाएंगे कितने कैमरे?

उन्होंने बताया की चीनी कैमरों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। पहले चरण के तहत 50 हजार चीनी कैमरों को बदलने की मंजूरी सरकार की तरफ से पहले ही दे दी गई है, जो कि पूरी तरह से सुधारात्मक कदम है। पहले से लगे सभी चीनी कैमरे को हटाकर उसकी जगह पर सुरक्षित और भरोसमंद सिस्टम लगाए जाएंगे।

पसंदीदा कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट देने की बहानेबाजी- AAP 

अब इस मुद्दे को लेकर दिल्ली की सियासत गरमा गई है। AAP दिल्ली के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज का कहना है कि मंत्री का यह आरोप असल में अपनी पसंदीदा कंपनी को नए ठेके देने का बहाना मात्र है। उन्होंने कहा कि Hikvision कैमरे पहले से ही केंद्र सरकार के कई प्रोजेक्ट्स में लगे हैं, जिनमें से मेट्रो सिस्टम भी एक हैं। कैमरे जनता की सुरक्षा के लिए बेहद अहम हैं। सौरभ भारद्वाज ने सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर इन कैमरों के लगाने से सचमुच राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर कोई चिंता है, तो बीजेपी सरकार ने देशभर में इनके इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक क्यों नहीं लगाई?

पूर्व मंत्री ने कहा कि चुनिंदा तौर पर जताई जा रही यह चिंता कई गंभीर सवाल खड़े करती है। ऐसा लगता है कि सुरक्षा से अधिक, मौजूदा सिस्टम को हटाने और उसकी जगह अपनी पसंदीदा कंपनी को नए कॉन्ट्रैक्ट देने की बहानेबाजी है। 

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