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जमुई न्यायालय ने दहेज हत्या के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश संदीप सिंह की अदालत ने आरोपी अजीत कुमार पंडित को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने पीड़ित परिवार को मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है। यह मामला जमुई थाना कांड संख्या 496/2023 से संबंधित है। हरनाहा गांव निवासी पीड़ित पिता ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी 23 वर्षीय बेटी सुभाषा कुमारी की शादी 22 फरवरी 2023 को टाउन थाना क्षेत्र के लगमा गांव निवासी अजीत पंडित से हुई थी। शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष द्वारा दहेज में मोटरसाइकिल, पलंग और नकद राशि की मांग को लेकर सुभाषा को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। अधिवक्ता गौरीशंकर तांती ने मजबूती से पक्ष रखा
पीड़ित पक्ष के अनुसार, 10 अगस्त 2023 को ससुराल वालों ने मिलकर सुभाषा की हत्या कर दी। सूचना मिलने पर जब परिजन मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने अपनी बेटी को मृत पाया। इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। मामले में सरकार की ओर से लोक अभियोजक धीरज सिंह ने प्रभावी पैरवी की, जबकि पीड़ित पक्ष की ओर से अधिवक्ता गौरीशंकर तांती ने मजबूती से पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 304(B) के तहत दोषी करार दिया। अपराधों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि दहेज प्रथा जैसी कुप्रथा से जुड़े अपराधों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही, विक्टिम कम्पेनसेशन स्कीम के तहत पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने का भी निर्देश दिया गया है। इस मामले में दोषसिद्धि का निर्णय 21 अप्रैल को सुनाया गया था, जबकि सजा के बिंदु पर अंतिम आदेश 6 मई को पारित किया गया। इस फैसले से पीड़ित परिवार को न्याय मिलने के साथ ही समाज में दहेज प्रथा के खिलाफ एक कड़ा संदेश गया है।
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