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गयाजी के बोधगया क्षेत्र में लगभग 35 साल से लंबित भूमि विवाद एक बार फिर सामने आया है। साल 1988-89 में बिहार सरकार की ओर से भूमिहीन लोगों को आवंटित परवाना की जमीन पर अब तक कब्जा नहीं मिल पाया है। ग्रामीण लंबे समय से जमीन की नापी और कब्जा दिलाने की मांग कर रहे हैं। हाल ही में अंचल अधिकारी, बोधगया ने जमीन की नापी के लिए आधिकारिक नोटिस जारी किया था, जिससे ग्रामीणों में उम्मीद जगी थी। हालांकि, इतने वर्षों के बाद भी इन जमीनों की विधिवत नापी नहीं हो सकी और न ही लाभुकों को वास्तविक कब्जा मिल पाया। इस संबंध में कई बार अधिकारियों को आवेदन दिए गए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने इन जमीनों पर अवैध कब्जा कर लिया है। जब भी नापी की कोशिश होती है, तो विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया बाधित होती रही है। गुरुवार को पीड़ित सभी परिवारों ने जिलाधिकारी से मुलाकात की और उन्हें अपनी मांगों से संबंधित आवेदन सौंपा। उन्होंने जिलाधिकारी से न्याय की उम्मीद जताई है। अब जानिए आखिर पूरा मामला क्या है? जानकारी के अनुसार, बोधगया प्रखंड के मोचारिम पंचायत अंतर्गत पकरडीह, छोटी बनमी और बड़ी बनमी टोला के कई परिवारों को 1988-89 में सरकार की ओर से जमीन आवंटित की गई थी। इस मुद्दे को लेकर 2012, 2013 और 2014 में भी आवेदन दिए गए थे, लेकिन मामला लंबित ही रहा। अंचल कार्यालय, बोधगया की ओर से जारी नोटिस (मामला संख्या 625/2025-26) में संबंधित जमीन की नापी के लिए तिथि निर्धारित की गई थी। सभी पक्षों को निर्धारित तिथि पर अपने दस्तावेजों के साथ मौके पर उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया था। अनुपस्थित रहने पर बाद में किसी भी प्रकार का दावा मान्य नहीं होने की बात कही गई थी। हालांकि, नापी नहीं होने से लाभुकों को वास्तविक कब्जा नहीं मिल सका है, जिसके बाद ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से नापी कराने की मांग की है।
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