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दिल्ली में जापान मॉडल से लगेगा बाढ़ पर लगाम डायवर्जन चैनल बनेंगे इस तकनीक से स्टोर होगा एक्स्ट्रा पानी…


Delhi Flood Control Plan: दिल्ली में 2023 में आई भयंकर बाढ़ तो आपको याद ही होगी, थोड़ी सी बारिश होते ही दिल्ली की सड़कें तालाब में तब्दील हो जाती है। यही समस्या राजधानी में ना हो इसको लेकर दिल्ली सरकार पहले से प्लानिंग कर रही है। दरअसल, हर साल मॉनसून के दौरान यमुना नदी उफान पर आ जाती है और निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो जाते हैं। ऐसे में इस भारी समस्या से निपटने के लिए इन दिनों दिल्ली सरकार एक ‘जापान मॉडल’ पर आधारित नई योजना बना रही है। इस प्लान के तहत यमुना के किनारे 18 डायवर्जन चैनल बनाए जाएंगे, जो बारिश का एक्ट्रा पानी कंट्रोल करने में मदद करेंगे।  

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PC: ANI

दिल्ली सरकार का प्लान क्या है? 

तेज बारिश के बाद दिल्ली में भयंकर बाढ़ देखने को मिलती है। लेकिन अब यमुना का एक्ट्रा पानी डायवर्ट करके स्टोर करने की प्लानिंग की जा रही है। इससे राजधानी के इलाकों में पानी की तबाही को रोका जा सकेगा। इस प्रोजेक्ट को लेकर सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग भी काम कर रहा है। 

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दिल्ली में ‘जापान मॉडल’ कैसे काम करेगा?

जापान में भारी बारिश के वक्त नदियों का पानी डायवर्ट चैनल्स के जरिए भूमिगत या अलग जगहों पर भेजा जाता है। टोक्यो में बड़े कंक्रीट शाफ्ट और स्टोरेज सिस्टम बने हैं, जो पानी को अस्थायी रूप से रोक लेते हैं और बाद में इस पानी को इस्तेमाल किया जाता है। दिल्ली सरकार इसी तर्ज पर काम कर रही है, ताकि भविष्य में बाढ़ जैसी स्थिति न आए। 

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भाटी माइंस में पानी स्टोरेज की तैयारी 

सरकार ने असोला भाटी माइंस एरिया में पुरानी माइनिंग से बने 15 बड़े गड्ढों को चुना है। इनमें कुल 5200 मिलियन लीटर प्रति दिन (MLD) बाढ़ का पानी स्टोर किया जा सकता है। ये गड्ढे करीब 60 दिनों तक पानी भरे रखने की क्षमता रखते हैं। इससे यमुना का अतिरिक्त पानी मोड़कर दिल्ली के निचले इलाकों को बचाया जा सकेगा। 

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फ्लड प्लेन के तहत 18 डायवर्जन चैनल बनेंगे 

यमुना के फ्लड प्लेन एरिया में 6 जगहों की पहचान की गई है। इनमें नॉर्थ बवाना एस्केप, साउथ ओल्ड बवाना एस्केप, सभापुर और तीन और स्थान शामिल हैं। यहां पानी स्टोर करने के लिए 18 डायवर्जन चैनल बनाने का प्रस्ताव है। इससे बारिश के मौसम में पानी का बहाव नियंत्रित रहेगा और बाढ़ का खतरा काफी कम हो जाएगा। 

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पल्ला में पहले भी शुरू हुआ था पायलट प्रोजेक्ट

बताया जा रहा है कि भाटी माइंस में सिर्फ साफ पानी ही स्टोर किया जाए, वरना भूजल प्रदूषित हो सकता है। इससे पहले भी पल्ला क्षेत्र में तालाब बनाने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ था, लेकिन रखरखाव महंगा होने से आगे नहीं बढ़ पाया। IIT दिल्ली के प्रोफेसर ए.के. गोसाईं जैसे विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि बारिश के पानी के साथ STP (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) का साफ पानी भी रिचार्ज के लिए इस्तेमाल किया जाए। 

दिल्ली सरकार का ये प्लान बाढ़ नियंत्रण के साथ-साथ पानी संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा। अगर योजना सही तरीके से लागू हुई तो मॉनसून में यमुना का रौद्र रूप कंट्रोल में रहेगा। साथ ही स्टोर किए गए पानी को सूखे मौसम में सिंचाई और बाकी जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। 

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