
Kushinagar News: उत्तर प्रदेश कुशीनगर जनपद के नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के ग्राम सभा गोईती बुजुर्ग के सबया अबदकारी टोला में लगी भीषण आग ने 28 परिवारों को उजाड़ दिया। आग की चपेट में आकर कुल 58 झोपड़ियां जलकर राख हो गईं। इस हादसे में करीब एक दर्जन बकरियों की भी जलकर मौत हो गई, जबकि आग बुझाने के दौरान दो लोग झुलस गए, जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार इस अग्निकांड में करीब एक करोड़ रुपये की क्षति हुई है।
पंपसेट की चिंगारी बनी तबाही की वजह
ग्रामीणों के अनुसार खेत की सिंचाई के लिए चल रहे पंपसेट के साइलेंसर से निकली चिंगारी पास में रखी सूखी गन्ने की पत्तियों पर गिर गई। तेज पछुआ हवा के कारण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और एक के बाद एक झोपड़ियां इसकी चपेट में आती चली गईं। आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कई घरों में रखी नगदी, जेवरात, राशन, कपड़े, साइकिल समेत पूरा घरेलू सामान जलकर नष्ट हो गया।
देरी से पहुंची दमकल, भड़का ग्रामीणों का गुस्सा
आग लगने की सूचना तत्काल अग्निशमन विभाग को दी गई, लेकिन दमकल की गाड़ी करीब एक घंटे की देरी से मौके पर पहुंची। तब तक ग्रामीण खुद ही आग बुझाने में जुटे रहे और काफी हद तक काबू पा लिया था। देरी से पहुंचे दमकल कर्मियों को ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा और वे गुस्से का शिकार भी बने। हालांकि कुछ समझदार लोगों के हस्तक्षेप से स्थिति को शांत कराया गया, जिसके बाद दमकल टीम और ग्रामीणों ने मिलकर आग पर पूरी तरह काबू पाया।
छह जिंदगियां बचाकर युवाओं ने दिखाई बहादुरी
इस भयावह आग के बीच इंसानियत की मिसाल भी देखने को मिली। पड़ोसी गांव मिश्रौली निवासी विकास जायसवाल (32) और शैलेन्द्र भारती (28) ने अपनी जान जोखिम में डालकर करीब छह महिलाओं और बच्चों की जान बचाई। जब चारों ओर अफरा-तफरी और चीख-पुकार मची थी, तब ये दोनों युवक बिना देर किए आग की लपटों के बीच कूद पड़े। उन्होंने एक-एक कर अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। उनकी इस बहादुरी की पूरे इलाके में सराहना हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ये दोनों समय पर नहीं पहुंचते, तो हादसा और बड़ा हो सकता था।
खुले आसमान के नीचे पीड़ित, मदद की मांग
इस अग्निकांड में यूनिस अंसारी, हसी मौलाना, मजहर, मुमताज, रमतुल्लाह, साकिर, हिदायत अली, मंसूर अली, तैयब, नूरुद्दीन, बसरूद्दीन, गुड्डू, बिजली, मैमुल्लाह, अफताब, नैमुल्लाह, नसुरुद्दीन, मुस्तफा, मुस्ताक, चंद्रिका यादव, चौधरी यादव, जैद आलम, अनवर समेत कई परिवार पूरी तरह बेघर हो गए हैं। नसरुद्दीन की पत्नी इमरून झुलस गईं, जबकि सलीम नामक युवक का हाथ भी झुलस गया। घटना के बाद पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। मौके पर पहुंची राजस्व और पुलिस टीम नुकसान का आकलन कर रही है। पीड़ितों ने प्रशासन से शीघ्र राहत और मुआवजे की मांग की है।