![]()
किशनगंज जिला, जो नेपाल, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश की सीमाओं से सटा है, लंबे समय से मादक पदार्थों की तस्करी का एक प्रमुख मार्ग रहा है। हालांकि, जनवरी 2026 में पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार के पदभार संभालने के बाद, जिले में नशे के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू किया गया है, जिसने अब जनआंदोलन का रूप ले लिया है। एसपी संतोष कुमार ने नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए पारंपरिक पुलिसिंग से हटकर रणनीति अपनाई। उन्होंने अपना मोबाइल नंबर सार्वजनिक किया और गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक किया। इस पहल से स्थानीय लोग अब नशा तस्करी से जुड़ी सूचनाएं सीधे पुलिस तक पहुंचाने लगे हैं। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन त्वरित कार्रवाई और बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए जिले में एक विशेष एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इस टीम ने सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के साथ मिलकर कई बड़ी कार्रवाइयों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। जनसहयोग और पुलिस की लगातार कार्रवाई के परिणामस्वरूप, पिछले सात महीनों में 133 तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। इस अवधि में पुलिस ने 5.14 किलोग्राम स्मैक, 3.63 किलोग्राम ब्राउन शुगर, 2.30 किलोग्राम हेरोइन, 430 किलोग्राम से अधिक गांजा और 50 लाख रुपये से अधिक नकद राशि जब्त की है।
असम-पश्चिम बंगाल पुलिस के साथ समन्वय फरवरी 2026 में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के किशनगंज दौरे के दौरान नशे के कारोबार पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, जिसके बाद जिले में अभियान को और तेज कर दिया गया। पुलिस की रणनीति केवल स्थानीय तस्करों तक सीमित नहीं है, बल्कि असम और पश्चिम बंगाल पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर बड़े नेटवर्क संचालकों और सप्लाई चेन से जुड़े लोगों तक पहुंचने पर भी काम किया जा रहा है। कारोबार और तस्करी से संबंधित 70 FIR दर्ज पुलिस आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी से 31 जुलाई 2026 के बीच अवैध नशा कारोबार और तस्करी से संबंधित कुल 70 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। पुलिस का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष अभियान जारी रहेगा और नशा तस्करी के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए लगातार कार्रवाई की जाएगी।
Source link