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रिश्तेदारों के जरिए व्हाइट किया चंदे का पैसा चढ़ावा चोरी मामले में आरोपियों का कुबूलनामा पुलिस ने बरामद की फर्जी पर्चियां…



Ayodhya Ram Mandir news: अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे चोरी के मामले में पुलिस की जांच जारी है। कोर्ट से मिली 40 घंटे की कस्टडी रिमांड में से 28 घंटे बीत चुके हैं और अब पुलिस के पास बचे हुए 12 घंटे बेहद कीमती हैं। जेल में बंद 8 आरोपियों में से मुख्य तीन- लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडे से लगातार मैराथन पूछताछ की जा रही है।

रिश्तेदारों को देते थे चोरी किया हुआ कैश, फिर…

अब तक की पूछताछ के दौरान तीनों आरोपियों ने पुलिस के सामने बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। आरोपियों ने बताया कि वे सीधे तौर पर चोरी की रकम अपने खातों में जमा नहीं करते थे, बल्कि वे इसकी जगह चोरी किए गए पैसों को सबसे पहले अपने बेहद करीबी दोस्तों और रिश्तेदारों को कैश के रूप में देते थे। इसके बाद, उन रिश्तेदारों से वह रकम वापस ऑनलाइन अपने बैंक खातों में ट्रांसफर करवाते थे।

ऐसा इसलिए किया गया जिससे पुलिस या मंदिर प्रशासन को शक न हो और ब्लैक मनी को व्हाइट करने की तर्ज पर पैसे का मुख्य सोर्स (चोरी) छिपाया जा सके। पुलिस ने जब आरोपियों और उनके करीबियों के बैंक स्टेटमेंट और वित्तीय लेन-देन खंगाले, तो उनके बयानों और बैंक डिटेल्स में हूबहू समानता पाई गई।

सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने यह भी बताया था कि वे बेखौफ होकर चढ़ावे से ज्यादा से ज्यादा नकदी निकालने की कोशिश किया करते थे। क्योंकि उन्हें भरोसा था कि वे कभी पकड़े नहीं जाएंगे। उनका मानना था कि मंदिर की व्यवस्था और अंदरूनी मिलीभगत की वजह से किसी को उन पर शक नहीं होगा।

बुधवार (8 जुलाई) पुलिस इन तीनों आरोपियों को लेकर उन गुप्त और सुनसान ठिकानों पर गई थी, जहां ये गैंग चोरी की गई रकम और कीमती आभूषणों को आपस में बांटता था। पुलिस की योजना इन जगहों से कुछ और पुख्ता सबूत या छिपाई गई रकम बरामद करने की थी।

आरोपियों ने पुलिस को एक दान पर्ची बरामद कराई और बताया कि उन्होंने हूबहू नकली रसीदें छपवा रखी थीं। वे श्रद्धालुओं से चंदा लेकर उन्हें यही फर्जी रसीद थमा देते थे और पूरा पैसा आपस में बांट लेते थे। वहीं, आरोपी अनुकल्प मिश्रा द्वारा पिछले साल खरीदी गई कार अब पुलिस के रडार पर है। पुलिस कार की फंडिंग, बैंक ट्रांजैक्शन और पेपर्स की जांच कर रही है। अगर यह साबित हुआ कि कार मंदिर की चोरी के पैसों से खरीदी गई थी, तो पुलिस इसे केस की प्रॉपर्टी मानकर जब्त कर लेगी।



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