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लाख में खरीदा और लाख में हरियाणा में बेचा टेलीग्राम से पेपर लीक की मिली सूचना नासिक से गिरफ्तार शुभम ने किए सनसनीखेज…



NEET परीक्षा पेपर लीक मामले में पुलिस जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। आरोपी डॉक्टर शुभम खैरनार ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि उसने पहले भी कुछ छात्रों को NEET का पेपर बेचा था, जिसमें लगभग 80 प्रतिशत सवाल मूल पेपर से मिलते-जुलते थे।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, अहिल्यानगर का रहने वाला धनंजय नाम का व्यक्ति, जो फिलहाल पुणे में रहता है, इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण कड़ी बनकर उभरा है। डॉक्टर शुभम खैरनार ने टेलीग्राम के जरिए धनंजय से NEET का पेपर खरीदा। इस लेन-देन की कीमत 10 लाख रुपये बताई जा रही है। बाद में डॉक्टर ने इस पेपर को 15 लाख रुपये में आगे बेच दिया, जिससे उन्हें 5 लाख रुपये का मुनाफा मिला।

पूरी डील सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर हुई। पुलिस को आशंका है कि यह सिर्फ एक छोटी कड़ी है और आगे चलकर एक बड़ी नेटवर्क और चेन सामने आ सकती है।

NEET-UG परीक्षा के पेपर लीक होने के आरोप में देश भर में कई जगहों पर छापेमारी और गिरफ्तारियां हो रही हैं। नासिक का यह मामला उनमें से एक है, जहां डॉक्टर जैसे पढ़े-लिखे व्यक्ति भी इस गैरकानूनी गतिविधि में शामिल पाए गए। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि धनंजय पेपर की मूल स्रोत तक कैसे पहुंचा और कितने छात्रों तक यह पेपर पहुंचाया गया।

पुलिस सूत्रों ने संकेत दिया है कि आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म पर होने वाले लेन-देन को ट्रेस करना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन तकनीकी टीम इस दिशा में काम कर रही है।

छात्रों और अभिभावकों के लिए चेतावनी

ऐसे मामलों से साफ है कि पेपर लीक माफिया सक्रिय है और छात्रों को आर्थिक लालच देकर फंसाया जा रहा है। NTA और पुलिस प्रशासन ने पहले भी चेतावनी दी है कि पेपर लीक से जुड़े किसी भी प्रस्ताव को तुरंत रिपोर्ट करें, वरना छात्रों की मेहनत और भविष्य दोनों खतरे में पड़ सकते हैं।

5 राज्यों में 9 गिरफ्तारियां, 45 हिरासत में

इस मामले में अब तक पांच राज्यों में 9 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और लगभग 45 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। मुख्य आरोपियों में से एक शुभम खैरनार को राजस्थान पुलिस से मिली सूचना के आधार पर चलाए गए संयुक्त अभियान के दौरान नासिक में गिरफ्तार किया गया।  

जयपुर से मनीष यादव को मास्टरमाइंड माना जा रहा है, उसे कस्टडी में लिया गया। NTA ने परीक्षा रद्द करने का बचाव करते हुए कहा कि यह कदम परीक्षा की पवित्रता बनाए रखने और छात्रों को निष्पक्ष मौका देने के लिए जरूरी था। CBI जांच पूरी होने के बाद दोबारा परीक्षा कराई जाएगी।



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