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खगड़िया सांसद राजेश वर्मा ने लोकसभा में कृषि और किसान कल्याण संबंधित अनुदानों की मांगों पर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की ओर से अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार किसानों की आत्महत्या को नहीं, बल्कि उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने का काम करती है। सांसद वर्मा ने देश के किसानों को ‘भाग्य विधाता’ बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रगान की पंक्ति ‘जन गण मन अधिनायक जय हे भारत भाग्य विधाता’ का सही अर्थ किसान ही चरितार्थ करते हैं। उनके अनुसार, NDA सरकार किसानों के सामूहिक प्रयासों से कृषि क्षेत्र में नए आयाम लिख रही है, क्योंकि देश तभी आगे बढ़ेगा जब किसान आगे बढ़ेगा। ”यूपीए सरकार के दौरान कृषि का बजट 27,633 करोड़ रुपये था” उन्होंने कृषि बजट की तुलना करते हुए बताया कि यूपीए सरकार के दौरान कृषि का बजट 27,633 करोड़ रुपये था। वहीं, एनडीए सरकार में यह बढ़कर 1 लाख 40 हजार करोड़ रुपये हो गया है, जो लगभग पांच गुना अधिक है। राजेश वर्मा ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने लागत पर 50% मुनाफे की सिफारिश को नजरअंदाज कर दिया था, जबकि एनडीए सरकार ने 2019 में इस योजना को न केवल स्वीकृत किया बल्कि लागू भी किया। उन्होंने यह भी बताया कि यूपीए सरकार में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 1310 रुपये था। यूपीए सरकार में मक्के पर एसपी 1310 रुपया खगड़िया सांसद राजेश वर्मा ने कहा, एनडीए की सरकार बनने के बाद 2369 रुपया देने का काम किया गया। यूपीए सरकार में मक्के पर एसपी 1310 रुपया दिया जाता था हमारी सरकार में 83% बढ़कर 2400 रुपए किया गया इसके लिए लोकसभा खगड़िया के किसानों की तरफ से हमारे देश के प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हैं। क्योंकि सबसे ज्यादा मक्के का उत्पादन किसी लोकसभा और जिले में होता है तो वह मेरी खगड़िया लोकसभा है। NDA की सरकार में 12. 51 लाख करोड़ रूपया किया गया खगड़िया सांसद राजेश वर्मा ने कहा, 2004 से 2013 में धान की खरीद यूपीए की सरकार में 4.40 लाख करोड़ रूपया किया गया था। NDA की सरकार में 12. 51 लाख करोड़ रूपया किया गया जो लगभग 3 गुना ज्यादा है। राजेश वर्मा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो खुद को किसानों का रहनुमा बताते हैं उनके कार्यकाल में 2004 से 2014 के बीच 1 लाख 70 हाजर 500 किसानों ने आत्महत्या की थी। हमारी सरकार किसानों को आत्महत्या करने पर नहीं उनके आत्मविश्वास बढ़ाने का काम करती है। यह स्वाभाविक सी बात है कि उनके समय में किसानों का आत्मविश्वास नहीं बढ़ाया जा सकता था क्योंकि उनके प्रधानमंत्री ही कहा करते थे कि यहां से 1 रुपया भेजते हैं तो किसानों को 15 पैसा मिलता है। अभी की सरकार जो भेजते हैं वह सीधे किसानों के खाते में जाता है। आज भारत 150.18 मिलियन टन चावल का उत्पादन कर चीन को पीछे कर विश्व में पहला स्थान प्राप्त किया है। ”अगर केंद्र सरकार की जनधन योजना लागू होती तो वो किसान आत्महत्या नहीं करते” बंगाल के कृषि मॉडल पर राजेश वर्मा ने बात करते हुए कहा कि कड़वा सच है कि ये कहते हैं कि यह किसानों के हितेषी है जबकि उनके यहां के किसान कोल्ड स्टोरेज के अभाव में आत्महत्या करने का काम किया था। उनकी सरकार मूकदर्शक बनी रही क्योंकि इन्हें सिर्फ राजनीति करनी थी। अगर केंद्र सरकार की जनधन योजना लागू होती तो वो किसान आत्महत्या नहीं करते। उनके समय में किसान मजबूर था हमारे समय में किसान मजबूत हुआ है। उन्होंने शायराने अंदाज में विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि तुम्हारे दौर में किसान सिर्फ फाइलों में आबाद थे, झूठे वादे से अन्नदाता बर्बाद थे। हमने माटी को चंदन मानकर हर बूंद पसीने का मोल चुकाया है जो तुम 60 साल में ना कर सके हमने 11 साल में कर दिखाया है।
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