जमुई के झाझा प्रखंड स्थित गिद्धको गांव के कुमार अभिनव ने अभिनय की दुनिया में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उनका चयन पुणे स्थित प्रतिष्ठित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) के दो वर्षीय स्क्रीन एक्टिंग कोर्स के लिए हुआ है।
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देशभर से हजारों प्रतिभागियों के बीच कड़ी चयन प्रक्रिया से गुजरते हुए अभिनव ने अंतिम 16 में जगह बनाई है। उनकी सफलता से परिवार के साथ झाझा और जमुई जिले में खुशी का माहौल है।
चार साल से रंगमंच पर कर रहे अभिनय
अभिनव ने अपने अभिनय सफर की शुरुआत रंगमंच से की। पिछले करीब चार वर्षों से वह प्रयागराज के थिएटर से सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। इस दौरान उन्होंने अभिनय की विभिन्न विधाओं को समझा और लगातार अभ्यास के जरिए अपनी प्रतिभा को निखारा। रंगमंच ने उन्हें संवाद अदायगी, भाव-भंगिमा और किरदारों को समझने का अनुभव दिया।

15 नाटकों में निभा चुके हैं भूमिका
कुमार अभिनव अब तक करीब 15 नाटकों में अभिनय कर चुके हैं। इस दौरान उन्हें देश के प्रतिष्ठित नाट्य समारोह नंदिकार और अलवर रंगम सहित कई बड़े आयोजनों में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। लगातार मंच पर सक्रिय रहने से उनके अभिनय में निखार आया। उन्होंने रंगमंच को सिर्फ शौक तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे करियर बनाने के लिए लगातार मेहनत की।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पूरी की पढ़ाई
अभिनय के साथ अभिनव ने अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से वर्ष 2022-25 सत्र में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वह इसी विश्वविद्यालय से फिल्म एंड थिएटर में मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने फिल्मी अभिनय में आगे बढ़ने का लक्ष्य तय किया और FTII की चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया।

परिवार और गांव में खुशी का माहौल
अभिनव के पिता सीताराम यादव जिला न्यायालय में अधिवक्ता हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। बेटे के प्रतिष्ठित संस्थान में चयन से दोनों बेहद खुश हैं। सफलता की खबर मिलने के बाद गिद्धको गांव में भी उत्साह का माहौल है। ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने अभिनव को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
अब कैमरे के सामने अभिनय सीखेंगे
FTII पुणे के दो वर्षीय स्क्रीन एक्टिंग कोर्स में अभिनव को कैमरे के सामने अभिनय, किरदारों की प्रस्तुति और फिल्मी अभिनय की तकनीकें सीखने का अवसर मिलेगा। गांव के रंगमंच से शुरू हुआ उनका सफर अब सिनेमा की दुनिया की ओर बढ़ रहा है। उनकी उपलब्धि उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बीच कला और सिनेमा में अपनी पहचान बनाने का सपना देखते हैं।