
Kota Mahant Murder: राजस्थान में कोटा जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। कोटा के बोरखेड़ा थाना इलाके में स्थित चंद्रेसल गांव के सुप्रसिद्ध चंद्रेसल मठ के महंत देवानंद महाराज की बीती रात अज्ञात हमलावरों द्वारा धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद से पूरे कोटा संभाग के धार्मिक और सामाजिक संगठनों में गहरा रोष फैल गया है। आपको बता दें कि यह मठ 1100 साल पुराना है।
जानकारी के अनुसार, मायापुरी अखाड़े से ताल्लुक रखने वाले महंत देवानंद महाराज जब सो रहे थे, तभी बदमाशों ने उन पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर दिए। फिलहाल हत्या के कारण सामने नहीं आया है। हालांकि यह बताया जा रहा है कि पूरी सोची समझी साजिश के तहत महंत की हत्या की गई है। पता चला है कि बदमाशों ने यहां पहले पुजारी के कमरे की बाहर से कुंडी लगा दी। फिर महंत के कमरे में गए और धारदार हथियार से हमला कर दिया।
अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित
हमले के बाद जब महंत ने मदद के लिए गुहार लगाई, तो आवाज सुनकर आसपास के लोग और सेवादार तुरंत मौके की तरफ दौड़े, जिन्हें देखकर हमलावर रात के अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए। जब मठ के सेवादार और स्थानीय ग्रामीण महंत देवानंद महाराज के कक्ष के भीतर पहुंचे, तो वहां का नजारा बेहद खौफनाक था। महंत जमीन पर पूरी तरह से लहूलुहान अवस्था में पड़े हुए थे और उनके शरीर से अत्यधिक खून बह चुका था। ग्रामीणों ने बिना एक पल गंवाए महंत को कोटा केमहाराव भीमसिंह (MBS) अस्पताल पहुंचाया। जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
पुलिस जांच में जुटी
इधर, घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची है। पुलिस और एसएफएल और डॉग स्क्वाड की टीम साक्ष्य जुटा रही है। साथ ही स्थानीय लोगों से भी पूरे मामले को जानने की कोशिश कर रही है। पुलिस हत्याकांड में कोई रंजिश, संपत्ति विवाद, चोरी की मंशा सहित अन्य संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच में जुटी हुई है। साथ ही साथ ही आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि अभी अनुसंधान जारी है, जल्द अपडेट देंगे। आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
महंत देवानंद महाराज के बारे में जानिए
चंद्रशील मठ के महंत स्वामी देवानंद राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के रहने वाले हैं। सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा की तहसील रजवाना के रहने वाले स्वामी देवानंद पिछले 4 साल से कोटा स्थित चंद्रेसल गांव में रह रहे थे। यहां मठ में रहकर आध्यात्मिक जीवन जी रहे थे।