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को मिला एशिया में वां स्थान भारत में बना वां सबसे बेहतरीन विश्वविद्यालय


टाइम्स हायर एजुकेशन (THE) की एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2025 जारी हो गई है। इस बार केआईआईटी (KIIT) डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी, भुवनेश्वर ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए एशिया में 184वां स्थान हासिल किया है। यह पिछले साल के मुकाबले एक बड़ी छलांग है, क्योंकि 2024 में इसकी रैंक 196 थी। यानी इस साल केआईआईटी ने 12 स्थान की बढ़त बनाई है, जो इसकी वैश्विक अकादमिक पहचान में लगातार हो रही प्रगति को दर्शाता है।

इस रैंकिंग के मुताबिक, भारत में केआईआईटी आठवां सबसे अच्छा विश्वविद्यालय बनकर उभरा है — सरकारी और निजी दोनों संस्थानों को मिलाकर। यह उपलब्धि देश के कई बड़े और पुराने संस्थानों को पीछे छोड़कर हासिल की गई है। इसके साथ ही, केआईआईटी ने पूर्वी और उत्तरी भारत का सबसे हाई रैंक वाला डीम्ड विश्वविद्यालय होने का सम्मान भी बनाए रखा है। खास बात यह है कि स्पोर्ट्स साइंस विषय में केआईआईटी को भारत में दूसरा स्थान मिला है।

35 देशों के 853 विश्वविद्यालयों में हुआ मूल्यांकन

एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2025 में 35 देशों/क्षेत्रों के 853 विश्वविद्यालयों को शामिल किया गया था। रैंकिंग में विश्वविद्यालयों के शोध, पढ़ाई-लिखाई, ज्ञान का प्रसार और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण जैसे पहलुओं का मूल्यांकन किया गया। यह मूल्यांकन 18 मानकों के आधार पर किया जाता है, जिन पर दुनियाभर के छात्र, शिक्षक, नीति-निर्माता और उद्योग जगत भरोसा करते हैं।

केआईआईटी, केआईएसएस और केआईएमएस के संस्थापक प्रोफेसर अच्युत सामंत ने इस सफलता पर सभी शिक्षकों, स्टाफ, छात्रों, पूर्व छात्रों और शुभचिंतकों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा, “यह रैंकिंग हमारे सामूहिक प्रयासों और मिशन-आधारित सोच का परिणाम है। यह उपलब्धि हर उस व्यक्ति की है जो हमारे मूल्यों में विश्वास करता है।”

वैश्विक मान्यता की ओर अग्रसर

केआईआईटी लगातार THE वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग, QS रैंकिंग जैसे वैश्विक प्लेटफॉर्म्स में भी शामिल होता आ रहा है। इसके अलावा, इसे IET, ABET जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के मान्यता प्रमाणपत्र भी मिल चुके हैं, जो इसे वैश्विक शिक्षा में उत्कृष्टता का केंद्र बनाते हैं।

27 साल में रचा इतिहास

सबसे खास बात यह है कि केआईआईटी की स्थापना सिर्फ 27 साल पहले हुई थी और इसे डीम्ड-टू-बी-यूनिवर्सिटी का दर्जा सिर्फ 21 साल पहले मिला था। इसके बावजूद इसने कई ऐसे पुराने संस्थानों को पीछे छोड़ दिया है जो 50 साल से भी अधिक समय से स्थापित हैं।


First Published – April 29, 2025 | 10:07 PM IST



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