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IGIMS Patna Ayushman Yojana Scam


पटना7 घंटे पहले

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फाइल इमेज। - Dainik Bhaskar

फाइल इमेज।

पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज में करीब 45 लाख रुपए की वित्तीय अनियमितता और गबन का मामला सामने आया है।

अस्पताल प्रशासन ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए आउटसोर्सिंग कंपनी के चार कर्मियों के खिलाफ शास्त्रीनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है।

आरोप है कि इन कर्मियों ने आयुष्मान भारत योजना के पात्र मरीजों का इलाज योजना के बजाय कैश बेसिस पर कराया और वसूली गई राशि का गबन कर लिया।

चारों कर्मी आयुष्मान भारत योजना से जुड़े हैं

संस्थान के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी प्रफुल्ल रंजन ने अमरजीत राज, चंदन कुमार, साकेत कुमार और अभिषेक कुमार के खिलाफ FIR दर्ज कराई है।

ये चारों कर्मी आयुष्मान भारत योजना से जुड़े कार्यों में तैनात थे और उन्हें आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से अस्पताल में नियुक्त किया गया था।

पूरे मामले का खुलासा एक मरीज की शिकायत के बाद हुआ। मरीज ने अस्पताल प्रशासन को बताया कि वह आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र होने के बावजूद उसका इलाज कैश बेसिस पर किया गया और उससे पैसे भी वसूले गए।

अस्पताल प्रशासन ने एक जांच समिति गठित की

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल प्रशासन ने तत्काल एक जांच समिति गठित की। समिति ने प्रारंभिक जांच में पाया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत गंभीर वित्तीय अनियमितता हुई है। सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया है। जांच में यह भी सामने आया कि योजना से जुड़े चार कर्मियों की प्रथम दृष्टया संलिप्तता सही पाई गई है।

मुख्य प्रशासनिक अधिकारी द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत में गबन, धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया गया है। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि संबंधित कर्मियों ने अपने गलत कार्यों को स्वीकार कर लिया है।

इधर अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीजों को योजना का लाभ देने के बजाय उन्हें सिस्टम से हटाकर कैश मरीज बना दिया जाता था। इसके बाद उनसे लिए गए पैसों का सही तरीके से हिसाब नहीं दिखाया गया और राशि की हेराफेरी कर ली गई।

संस्थान के डिप्टी डायरेक्टर प्रो.(डॉ.) विभूति प्रसन्न सिन्हा ने बताया, इस पूरे मामले में करीब 45 लाख रुपए के गबन की आशंका है। यह खेल पिछले 3-4 महीने से चल रहा था।

डिप्टी डायरेक्टर सह संस्थान प्रवक्ता प्रो. विभूति प्रसन्न सिन्हा।

डिप्टी डायरेक्टर सह संस्थान प्रवक्ता प्रो. विभूति प्रसन्न सिन्हा।

उन्होंने बताया की इसकी जांच के 6 सदस्यीय कमिटी का गठन किया गया है, जिसमें बिहार सरकार के फाइनेशियल एडवाइजर को भी शामिल किया गया है।

उन्होंने बताया कि संस्थान में इस तरह की अनियमितता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हालांकि संस्थान ने कारवाई करते हुए चारों कर्मियों को तत्काल प्रभाव से काम से हटा दिया गया है।

आउटसोर्सिंग कंपनी ने लौटाया राशि

मामले की जानकारी मिलने के बाद अस्पताल प्रशासन ने संबंधित आउटसोर्सिंग कंपनी को भी इसकी सूचना दी। इसके बाद कंपनी ने संस्थान को पूरी राशि वापस कर दी है।

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि फिलहाल यह जांच का विषय है कि आखिर किस तरीके से योजना में गड़बड़ी की गई। सरकारी राशि का दुरुपयोग कैसे हुआ? यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस मामले में अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल हैं।

पुलिस और स्वास्थ्य विभाग दोनों करेंगे जांच

शास्त्रीनगर थाना पुलिस ने मामला दर्ज होने की पुष्टि की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गयी है। दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग भी इस पूरे मामले की अलग से जांच करायेगा। IGIMS प्रशासन ने मामले की विस्तृत जानकारी विभाग को भेज दी है।

विभाग की टीम यह पता लगाएगी कि योजना के क्रियान्वयन में कहां लापरवाही हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाने होंगे।

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