
शराब घोटाला केस में दिल्ली कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को CBI केस में बरी कर दिया है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को कहा- दोनों के खिलाफ बिना सबूत के आरोप साबित नहीं होता है। कोर्ट ने कहा कि प्रॉसिक्यूशन अपना केस साबित करने में विफल रहा है। गौरतलब है कि 17 नवंबर 2021 को दिल्ली सरकार ने दिल्ली में नई शराब नीति लागू की थी।
शराब नीति में कथित गड़बड़ी का खुलासा 8 जुलाई 2022 को दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव नरेश कुमार की रिपोर्ट से हुआ था। इस रिपोर्ट में उन्होंने मनीष सिसोदिया समेत आम आदमी पार्टी के कई बड़े नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए गए। दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना ने सीबीआई जांच की सिफारिश की। इसके बाद सीबीआई ने 17 अगस्त 2022 को केस दर्ज किया।
लाइसेंस धारकों को अनुचित लाभ देने का आरोप
सीबीआई और ईडी का आरोप था कि आबकारी नीति को संशोधित करते समय अनियमितता की गई थीं और लाइसेंस धारकों को अनुचित लाभ दिया गया था। इसमें लाइसेंस शुल्क माफ या कम किया गया था। इस नीति से सरकारी खजाने को 144.36 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। मामले में जांच की सिफारिश करने के बाद 30 जुलाई 2022 को दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति को वापस लेते हुए पुरानी व्यवस्था बहाल कर दी थी। घोटाले से जुड़े सीबीआइ और ईडी के मामले में मनीष सिसोदिया को निचली अदालत से लेकर हाई कोर्ट तक राहत नहीं मिली।
दिल्ली शराब घोटला केस की पूरी टाइमलाइन
बरी किए गए 23 आरोपियों की सूची
आपको बता दें कि यह फैसला राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। AAP इसे अपनी ‘राजनीतिक जीत’ बता रही है और जांच को विपक्षी नेताओं पर दबाव की रणनीति कह रही है। वहीं विरोधी दलों का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया अभी खत्म नहीं हुई और ऊपरी अदालतों में चुनौती दी जा सकती है। लेकिन फिलहाल इस निर्णय ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली और राजनीतिक मामलों में उनकी भूमिका पर नई बहस छेड़ दी है।