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बदलने वाली है पीएफ निकासी की पूरी प्रक्रिया ये बदलाव आसान बना देंगे निकालने का प्रोसेस…



EPFO 3.0 Rules: ईपीएफओ की नई व्यवस्था पीएफ निकासी को एक बेहद सरल और डिजिटल प्रक्रिया बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यहां उन 8 प्रमुख बदलावों और महत्वपूर्ण बिंदुओं का विवरण दिया गया है जो नौकरीपेशा लोगों के लिए राहत लेकर आएंगे। 

डिजिटल और आसान PF निकासी

EPFO 3.0 का प्राथमिक उद्देश्य PF निकासी प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल बनाना है ताकि इसे बैंक अकाउंट से पैसे निकालने जितना आसान किया जा सके। अब आपको लंबा फॉर्म भरने या बार-बार ऑफिस के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि यह नया सिस्टम पूरी तरह से तकनीक पर आधारित है। माना जा रहा है कि यह बदलाव 2026 के मध्य तक पूरी तरह लागू हो जाएंगे।

UPI और ATM आधारित निकासी

अब PF निकासी के लिए आपको लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। नई व्यवस्था में आप UPI और ATM का उपयोग करके सीधे अपने पैसे निकाल सकेंगे। यह सिस्टम NPCI के साथ एकीकृत किया जा रहा है, जिससे PhonePe, Google Pay और Paytm जैसे ऐप्स के जरिए भी फंड एक्सेस करने की सुविधा मिल सकती है। पैसा सीधे आपके लिंक्ड बैंक खाते में आएगा और इसके लिए प्रमाणीकरण की प्रक्रिया OTP के जरिए पूरी होगी। 

ऑटो-सेटलमेंट सीमा में बड़ी बढ़ोतरी

EPFO ने ऑटो-सेटलमेंट की सीमा को एक लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है। इस बड़े बदलाव के कारण अब ज्यादातर क्लेम कुछ ही घंटों या एक दिन के भीतर निपट जाएंगे। इस सुविधा से उन लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जिन्हें अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है, क्योंकि उन्हें क्लेम के मंजूर होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

निकासी का तीन श्रेणियों में विभाजन

इसके अलावा EPF ने निकासी प्रक्रिया को स्पष्ट बनाने के लिए इसे तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा है।

  • पहली श्रेणी ‘जरूरतें’ है, जिसमें इलाज, पढ़ाई या शादी शामिल है। 
  • दूसरी श्रेणी ‘हाउसिंग’ है, जिसके लिए कम से कम 5 साल की नौकरी का नियम है।
  • तीसरी श्रेणी ‘स्पेसिफिक कंडिशन’ है, जैसे बेरोजगारी या रिटायरमेंट। 

इस स्पष्ट वर्गीकरण से क्लेम रिजेक्ट होने की संभावना काफी कम हो जाएगी।

एंप्लायर पर निर्भरता में कमी

अब पीएफ निकासी के लिए एंप्लायर की मंजूरी या वेरिफिकेशन की अनिवार्यता को काफी कम कर दिया गया है। अधिकतर मामलों में अब आधार-बेस्ड OTP के जरिए ही पहचान की पुष्टि हो जाएगी। सामान्य निकासी के लिए अब ‘सेल्फ-सर्टिफिकेशन’ की सुविधा भी दी गई है, जिससे एंप्लायर की मंजूरी न मिलने के कारण होने वाली देरी पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

तेज प्रोसेसिंग के लिए बैंक साझेदारी

EPFO ने अपनी क्लेम प्रक्रिया को गति देने के लिए देश के 32 प्रमुख सार्वजनिक और निजी बैंकों के साथ साझेदारी की है, जिनमें SBI, HDFC और ICICI जैसे बैंक शामिल हैं। यह साझेदारी फंड के योगदान को ट्रैक करने, क्लेम वेरिफिकेशन और सेटलमेंट की गति को बढ़ाने में मदद करेगी, जिससे कर्मचारियों को अपना पैसा समय पर मिल सकेगा।

जरूरी शर्तें और डेटा अपडेट

इस सुविधा का लाभ लेने के लिए कुछ बुनियादी तकनीकी चीजों का सही होना अनिवार्य है। आपके पास एक सक्रिय UAN होना चाहिए, जिसे Aadhaar से लिंक करना जरूरी है। इसके साथ ही PAN कार्ड का लिंक्ड होना आवश्यक है ताकि टैक्स कटौती कम हो। साथ ही, IFSC कोड सहित बैंक खाते की सही जानकारी अपडेट होनी चाहिए ताकि लेनदेन में कोई बाधा न आए।

पूरी तरह टैक्स-फ्री निकासी 

इस बदलाव के बावजूद पीएफ निकासी पर लागू टैक्स नियमों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। यदि आप लगातार 5 साल की नौकरी पूरी करने के बाद पैसा निकालते हैं, तो यह निकासी पूरी तरह टैक्स-फ्री रहेगी। हालांकि, 5 साल से पहले ₹50,000 से अधिक की निकासी पर TDS काटा जाएगा। वहीं यदि पैन लिंक नहीं है, तो उच्च दर पर टैक्स देना पड़ सकता है।

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