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खगड़िया में गंगा और कोसी नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इसी के साथ आगामी श्रावणी मेले की तैयारियों को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। गुरुवार को जिलाधिकारी विक्रम विरकर ने परबत्ता प्रखंड के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का व्यापक निरीक्षण किया और अगुवानी गंगा घाट पर श्रावणी मेले की तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उनके साथ उप विकास आयुक्त श्वेता भारती और गोगरी अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। जिलाधिकारी ने कबेला, माधवपुर, दरियापुर भेलवा, जोरावरपुर और तेमथा करारी सहित कई बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। उन्होंने जलस्तर, तटबंधों की स्थिति, संभावित कटाव वाले क्षेत्रों और राहत शिविरों की तैयारियों का बारीकी से निरीक्षण किया। डीएम ने अधिकारियों को हर परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान, जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री, खाद्यान्न, स्वच्छ पेयजल, दवाइयां, चिकित्सा सुविधा और पशुओं के लिए चारा जैसी सभी आवश्यक सरकारी सहायता समय पर पहुंचाई जाए। लापरवाही नहीं की जाएगी बर्दाश्त उन्होंने चेतावनी दी कि राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी संबंधित अधिकारियों को क्षेत्र में लगातार कैंप करने और लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के लिए कहा गया। अपने दौरे के दौरान, जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों ने उन्हें बाढ़, कटाव और आवागमन से संबंधित चुनौतियों से अवगत कराया। डीएम ने कई मामलों में मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए और समस्याओं के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने दोहराया कि प्रशासन की प्राथमिकता लोगों के जान-माल की सुरक्षा और समय पर राहत सुनिश्चित करना है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण पूरा करने के बाद, जिलाधिकारी अगुवानी गंगा घाट पहुंचे। यहां उन्होंने आगामी श्रावणी मेले की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने बस स्टैंड, गंगा घाट, कांवड़िया पथ और मेला क्षेत्र का निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं। सुचारु यातायात व्यवस्था पर दिया जाएगा ध्यान डीएम ने कहा कि सावन माह में अगुवानी गंगा घाट पर बड़ी संख्या में शिवभक्त गंगा जल भरने पहुंचते हैं। ऐसे में कांवड़ियों के ठहरने, विश्राम, स्वच्छ पेयजल, अस्थायी शौचालय, स्नान घाट की सफाई, स्वास्थ्य शिविर, एम्बुलेंस, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा, पार्किंग और सुचारु यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो और सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि मेला क्षेत्र में साफ-सफाई की नियमित व्यवस्था, पर्याप्त संख्या में पुलिस बल एवं दंडाधिकारी की तैनाती, महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन टीम की उपलब्धता तथा कंट्रोल रूम की सक्रियता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि भीड़ प्रबंधन की समुचित योजना पहले से तैयार रहे, ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी विक्रम विरकर ने कहा कि बाढ़ की चुनौती और श्रावणी मेले का सफल आयोजन—दोनों प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। सभी विभाग समन्वय बनाकर कार्य करें, ताकि एक ओर बाढ़ प्रभावित लोगों को समय पर राहत और सुरक्षा मिल सके, वहीं दूसरी ओर लाखों शिवभक्तों को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुविधाजनक वातावरण में जलार्पण का अवसर प्राप्त हो। प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। निरीक्षण के दौरान उप विकास आयुक्त श्वेता भारती, गोगरी एसडीओ संजय कुमार, परबत्ता बीडीओ संतोष कुमार पंडित, सीओ हरिनाथ राम सहित जल संसाधन, स्वास्थ्य, पुलिस, आपदा प्रबंधन एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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