नीतीश कुमार के जाने के बाद क्या बिहार में शराबबंदी खत्म होने वाली है?
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यह सवाल जैसे-जैसे भाजपा के मुख्यमंत्री बनने का दिन नजदीक आ रहा है, लोगों के जेहन में तेजी से उठ रहा है। JDU को छोड़कर बाकी सारी पार्टियों BJP, RJD, HAM, RLM और LJP(R) के विधायक अब मुखरता से इसे खत्म करने की मांग कर रहे हैं।
नई सरकार बनते ही क्या शराब पर से प्रतिबंध हटने वाला है। क्या पूरी तरह खत्म होगा कानून। शराबबंदी कानून खत्म करने की डिमांड क्यों उठ रही। जानेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…।
सवाल-1ः शराबबंदी कानून को लेकर हाल में किस नेता ने क्या बातें कही?
जवाबः शराबबंदी कानून को खत्म करने की डिमांड समय-समय पर होती रही है। इसमें विपक्ष के नेता से लेकर सत्ताधारी दल के नेता तक शामिल हैं।
- 9 अप्रैल को भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री विनय बिहारी ने कहा, ‘बंदी का कोई असर नहीं है। सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए कि हम कैसे काम करें ताकि राजस्व भी आए और लोगों को परेशानी भी न हो। हमारे पास इतनी पुलिस भी नहीं है। मुझे लगता है कि सरकार को विचार करना चाहिए।’
- 6 अप्रैल को शराबबंदी के 10 साल पूरे होने पर RJD नेता तेजस्वी यादव ने कहा, ‘बिहार में शराबबंदी कानून मजाक बन गया है। 40,000 करोड़ का अवैध समानांतर शराब कारोबार खड़ा हो गया है। 16 लाख लोगों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन बड़े सप्लायर और तस्कर अभी तक पकड़े नहीं गए। किसी सीनियर पुलिस अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई। सरकार उन अधिकारियों पर क्यों कार्रवाई नहीं करती जो भ्रष्टाचार से शराबबंदी को कमजोर कर रहे हैं?’
- 5 अप्रैल को बिहार सरकार के मंत्री और JDU नेता अशोक चौधरी ने साफ कहा- ‘नीतीश कुमार के सीएम पद से हटने के बाद शराबबंदी खत्म होगी या नहीं, इस पर अभी कुछ भी कहना मुश्किल है।’
- मोतिहारी जहरीली शराब कांड के बाद 3 अप्रैल को केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा- ‘शराबबंदी के पीछे सरकार की मंशा और सोच सही है, लेकिन इसकी आड़ में पनप रहे अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण कैसे किया जाए, इस पर गंभीर चर्चा की जरूरत है।’
- इससे पहले विधानसभा में 17 फरवरी को राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) विधायक माधव आनंद ने कहा था, ‘अब समय आ गया है, जब इस कानून की व्यापक समीक्षा होनी चाहिए। इसे बेहतर ढंग से लागू करने, जागरूकता बढ़ाने और जहां जरूरी हो, वहां संशोधन किए जाने चाहिए।’

सवाल-2ः क्या नीतीश कुमार के जाने के बाद खत्म होगी शराबबंदी?
जवाबः ज्यादा संभव है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नई सरकार चरणबद्ध तरीके से बिहार में शराबबंदी कानून को हटा सकती है।
बताया जा रहा है कि सरकार पहले चरण में सरकारी नियंत्रण में शराब की बिक्री शुरू करेगी। नियंत्रित IMFL (Indian Made Foreign Liquor) आउटलेट्स खोले जाएंगे। इसके 3 बड़े मकसद हैं…
- ब्लैक मार्केट पर काबू पाना।
- अवैध शराब की होम डिलीवरी और स्मगलिंग को कम करना।
- पैसा जुटाना है।
पहले चरण के रिजल्ट का एनालिसिस किया जाएगा, उसके आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा। मतलब शराबबंदी को पूरी तरह से हटाने का ऐलान होगा।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एक झटके में कानून को हटाने से बचना चाहती है। इससे महिलाओं, नीतीश समर्थकों के नाराज होने की संभावना है।
हालांकि, अब तक सरकार ने आधिकारिक तौर पर शराबबंदी को खत्म करने का कोई बयान नहीं दिया है।

कुछ दिन पहले मोतिहारी में जहरीली शराब पीने से 7 लोगों की मौत हो गई थी। इस पर विपक्ष ने सरकार की शराबबंदी पर सवाल उठाए थे।
सवाल-3ः क्यों खत्म हो सकती है शराबबंदी?
जवाबः शराबबंदी कानून को खत्म करने के कयासों को पहली बार बल तब मिला जब 7 मार्च को डिप्टी CM सम्राट चौधरी ने बयान दिया।
- भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के बिहार चैप्टर की वार्षिक बैठक में चौधरी ने कहा था- ‘शराबबंदी से बिहार को हर साल करीब 28 से 30 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। इसके बावजूद यह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जीवन का सबसे ऐतिहासिक निर्णय है।’
- सम्राट चौधरी का यह बयान काफी महत्वपूर्ण था। क्योंकि पहली बार सरकार ने शराबबंदी कानून से आर्थिक नुकसान की बातें कही थी।
- फिलहाल 10 साल बाद शराबबंदी कानून के खत्म होने का मजबूत आधार आर्थिक कारण ही माना जा रहा है। महिलाओं के लिए 10 हजारी स्कीम, 125 यूनिट फ्री बिजली जैसी योजनाओं से राज्य की आर्थिक स्थिति बहुत सही नहीं है।
- 9 अप्रैल को राज्य की आर्थिक स्थिति पर तंज कसते हुए तेजस्वी यादव ने कहा-’बिहार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कर्मचारियों को छोड़ दीजिए, हमें भी सैलरी नहीं मिली है। कर्मचारियों को समय पर वेतन तक नहीं मिल रहा। ठेकेदारों का पेमेंट नहीं हो रहा। राज्य में अराजकता की स्थिति बन गई है।’

हर साल 20 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान
शराब बिक्री से बिहार को एक्साइज ड्यूटी (शराब पर टैक्स) मिलता था। यह राज्य की कुल GSDP (सकल घरेलू उत्पाद) का लगभग 1% था और राज्य के अपने टैक्स राजस्व का 15% से ज्यादा हिस्सा था।
- शराबबंदी से पहले वाले वित्तीय वर्ष 2015-16 में राज्य को शराब से ₹3,142 करोड़ टैक्स के तौर पर मिले थे।
- शराबबंदी के बाद 2016-17 में यह घटकर 30 करोड़ रह गया, और अब लगभग शून्य है।
- जबकि, शराबबंदी नहीं वाले राज्यों में औसतन 2022-23 में एक्साइज से GSDP का 1% राजस्व आता है। बिहार में यह पूरी तरह खत्म हो गया।
- PRS की रिपोर्ट के मुताबिक, बैन से बिहार को हर साल GSDP का 1% का नुकसान हो रहा है।