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महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद सड़कों पर उतरे योगी सीएम आवास से पैदल निकाला मार्च कहा सपा और कांग्रेस का चेहरा अलोकतांत्रिक…



Uttar Pradesh News: महिला आरक्षण बिल संसद में पारित न होने पर बवाल जारी है। सरकार विपक्ष पर हमलावर है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी सड़कों पर उतर आए हैं। आज (21 मार्च) को उन्होंने मुख्यमंत्री आवास से विधान भवन तक ‘जन आक्रोश महिला पदयात्रा’ निकाली। इसमें वे पैदल मार्च करते नजर आए।

सीएम योगी की अगुवाई में इस पदयात्रा की शुरुआत लखनऊ में कालीदास मार्ग पर स्थित सीएम आवास से हुई और विधान भवन पर जाकर खत्म हुई। दोनों डिप्टी केशव प्रसाद मौर्य और और ब्रजेश पाठक के साथ यूपी बीजेपी के अध्यक्ष पंकज चौधरी भी इसमें शामिल हुए। बड़ी संख्या में महिलाएं पदयात्रा का हिस्सा बनीं।

सपा-कांग्रेस के कृत्य महिला विरोधी- CM योगी

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ इस दौरान समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर जमकर बरसते नजर आए। उन्होंने कहा, “कांग्रेस हो या समाजवादी पार्टी इनका चेहरा अलोकतांत्रिक है। इनके कृत्य महिला विरोधी हैं। पीएम मोदी ने जो विकल्प दिया था अपनी महिला विरोधी छवि को समाप्त करने के लिए उसका उन्होंने नाजायज दुरुपयोग करने का प्रयास किया है। आज देशभर में आधी आबादी कांग्रेस और उनके सहयोगी दलों के आचरण के खिलाफ सड़कों पर आंदोलन कर रहा है।

उन्होंने कहा कि देश के अंदर केवल चार जाति है, पहली जाति महिला, दूसरी गरीब की, तीसरी युवा की और चौथी किसान की। पीएम मोदी ने सभी नीतियों को इन्हीं चार के अंतर्गत केंद्रित करते हुए देश को आज आर्थिक उन्नति के नए सोपान तक पहुंचाने में सफलता प्राप्त की है।

सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री चाहते थे कि 2029 में ही महिला आरक्षण बिल लागू हो जाए। आज की इस आक्रोश रैली में बहनें आज भागीदार बनी है। जिस तरह से केंद्र की मोदी सरकार महिलाओं के लिए योजनाएं चला रही है। उसी तरह डबल इंजन की सरकार में भी चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज बहनों के नेतृत्व में यह विरोध मार्च पूरे देश में, विशेष रूप से आधी आबादी के बीच, कांग्रेस, SP, TMC और DMK की महिला आरक्षण विरोधी नीतियों के खिलाफ गुस्से का प्रतीक बनेगा।

विपक्ष मोदी विरोध में अंधा हो गया है- पंकज चौधरी

इस मौके पर प्रदेश BJP अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि महिला आरक्षण बिल से किसी को कोई नुकसान होने वाला नहीं था। इससे देश की आधी आबादी को विधानसभा और लोकसभा में उनका अधिकार मिलता। 2029 से इसे लागू करने के लिए सरकार थोड़ा संशोधन करना चाहती थी, जो विपक्ष को यह रास नहीं आया। विपक्ष मोदी विरोध में अंधा हो गया है, इसलिए हर अच्छी बात भी उन्हें खराब लगती है।



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