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Bihar Cyber Crime Action | CCSU Arrests Deepfake Fake News Spreaders


पटना12 मिनट पहले

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बिहार में बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए बिहार पुलिस की साइबर क्राइम एंड सिक्योरिटी यूनिट (CCSU) ने पिछले छह महीनों में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है। यूनिट ने इस अवधि में 475 FIR दर्ज कर 103 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

यह कार्रवाई का फोकस भ्रामक या आपत्तिजनक सामग्री जैसे, DeepFake वीडियो, फेक न्यूज, साइबर स्टॉकिंग, अश्लील कंटेंट और सोशल मीडिया के दुरुपयोग से जुड़े मामलों पर केंद्रित है।

CCSU के आंकड़ों के मुताबिक, ऑनलाइन पेट्रोलिंग के दौरान 1320 आपत्तिजनक URL को विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटवाया गया।

यूनिट लगातार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन पेट्रोलिंग कर रही है। सोशल मीडिया कंपनियों की मदद से कई प्लेटफॉर्म को 692 कानूनी नोटिस भेजे गए, जिसके बाद 529 फर्जी और आपत्तिजनक सोशल मीडिया अकाउंट बंद कराए गए।

महिलाओं और बच्चियों से जुड़े साइबर अपराधों पर विशेष नजर

बिहार पुलिस का कहना है कि महिलाओं और बालिकाओं के खिलाफ होने वाले साइबर अपराधों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। फर्जी प्रोफाइल बनाकर बदनाम करना, मॉर्फ्ड तस्वीरें वायरल करना, साइबर स्टॉकिंग और ऑनलाइन उत्पीड़न जैसे मामलों में तकनीकी जांच के जरिए आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस के मुताबिक, कई मामलों में महिलाओं के नाम से फर्जी अकाउंट बनाकर उनकी तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ की जाती है और उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल किया जाता है। ऐसे मामलों में तकनीकी जांच के जरिए आरोपियों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

इसके साथ ही कई फर्जी प्रोफाइल का उपयोग लोगों की तस्वीरों के दुरुपयोग, अफवाह फैलाने, अश्लील सामग्री साझा करने या सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने के लिए किया जा रहा था। ऐसे सभी मामलों में संबंधित प्लेटफॉर्म से समन्वय स्थापित कर फौरन कार्रवाई सुनिश्चित की गई।

डीपफेक और AI से तैयार फर्जी कंटेंट भी रडार पर

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डीपफेक वीडियो और फर्जी ऑडियो तैयार करने की घटनाएं भी तेजी से बढ़ी हैं। CCSU ने ऐसे मामलों को गंभीर साइबर अपराध की श्रेणी में रखा है।

पुलिस के मुताबिक, किसी व्यक्ति की तस्वीर, वीडियो या आवाज का इस्तेमाल कर AI के जरिए आपत्तिजनक या भ्रामक कंटेंट तैयार करना और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करना कानूनन अपराध है।

ऐसे मामलों की तकनीकी जांच कर संबंधित लोगों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ FIR दर्ज कर गिरफ्तारी की जा रही है।

फेक न्यूज और अफवाह फैलाने वालों पर भी सख्त कार्रवाई

सोशल मीडिया पर फेक न्यूज और अफवाहें फैलाकर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ भी बिहार पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। पुलिस का कहना है कि किसी भी समुदाय, धर्म या वर्ग के बीच तनाव पैदा करने वाले पोस्ट, वीडियो या संदेशों को गंभीरता से लिया जा रहा है।

इसके अलावा कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली भ्रामक सूचनाएं, हिंसा भड़काने वाले संदेश और समाज में भ्रम पैदा करने वाले डिजिटल कंटेंट की पहचान कर उन्हें तत्काल हटाने के साथ-साथ संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है।

संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट पर भी नजर

CCSU ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों, न्यायपालिका, सरकारी संस्थानों या अन्य सार्वजनिक संस्थाओं के खिलाफ आपत्तिजनक और भ्रामक पोस्ट करने वालों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

इसके अलावा सोशल मीडिया पर हथियारों का प्रदर्शन, हिंसा के लिए उकसाने वाली सामग्री साझा करना, संदिग्ध मोबाइल एप्लिकेशन या वेबसाइट्स का प्रचार-प्रसार करना और साइबर अपराध को बढ़ावा देने वाली गतिविधियां भी पुलिस की निगरानी में हैं। ऐसे मामलों में डिजिटल साक्ष्य जुटाकर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

लगातार चल रही ऑनलाइन पेट्रोलिंग

पुलिस के मुताबिक, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक और साइबर विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।

CCSU की टीम 24 घंटे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की ऑनलाइन मॉनिटरिंग कर रही है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब, टेलीग्राम समेत विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे पोस्ट, फोटो, वीडियो और अन्य कंटेंट पर नजर रखी जा रही है।

यह यूनिट संदिग्ध गतिविधियां सामने आने पर उनकी तकनीकी जांच करती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित प्लेटफॉर्म को कंटेंट हटाने के लिए नोटिस भेजा जाता है।

जिम्मेदारी के साथ सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की अपील

बिहार पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया का उपयोग जिम्मेदारी के साथ करें। किसी भी अपुष्ट जानकारी, फर्जी वीडियो या भ्रामक पोस्ट को बिना सत्यापन के साझा न करें। महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली सामग्री, फेक न्यूज, डीपफेक वीडियो या सांप्रदायिक तनाव फैलाने वाले पोस्ट साझा करना गंभीर दंडनीय अपराध है।

पुलिस ने चेतावनी दी है कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों में आगे भी निगरानी और कार्रवाई का अभियान जारी रहेगा। डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग कर समाज में अशांति फैलाने या किसी व्यक्ति की छवि खराब करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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