एआई से फर्जी फोटो-वीडियो बनाने और दूसरे राज्यों की घटनाओं को बिहार का बताकर वायरल करने का आरोप।
भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद सोशल मीडिया पर प्रसारित आपत्तिजनक, भ्रामक और भड़काऊ कंटेंट को लेकर पुलिस ने सख्ती बरती है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और सीएम सम्राट के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर वीडियो डालने वाले 30 यूजर आईडी धा
.
पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक कंटेंट से कानून-व्यवस्था प्रभावित होने और समाज में सरकार-पुलिस के प्रति अविश्वास और असंतोष फैलाने की कोशिश की जा रही थी। मामले की जांच शुरू कर संबंधित यूजर आईडी धारकों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
साइबर मॉनिटरिंग के दौरान फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब समेत विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कई ऐसे अकाउंट चिह्नित किए गए, जिससे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और मुख्यमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट प्रसारित किए गए।

अकाउंट बंद कराने की प्रक्रिया
हालांकि प्राथमिकी में किसी विशेष घटना का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि यह कार्रवाई भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर प्रकरण के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पोस्ट और वीडियो के संदर्भ में की गई है। पुलिस इस पूरे मामले की तकनीकी जांच कर रही है और संबंधित यूजर आईडी के संचालन से जुड़े लोगों की पहचान जुटाई जा रही है।
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि एआई तकनीक का दुरुपयोग कर फर्जी फोटो और वीडियो तैयार करने के लिए किया गया है। अन्य राज्यों की घटनाओं के वीडियो को भोजपुर या बिहार का बताकर साझा किया गया, जिससे आम लोगों को भ्रमित करने और माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया गया।
पुलिस ने ऐसे सभी संदिग्ध यूजर आईडी को चिह्नित कर संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से आपत्तिजनक पोस्ट हटाने और अकाउंट बंद कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।