
भारत अपनी हवाई सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रहा है। इसी कड़ी में भारत के स्वदेशी फाइटर जेट तेजस Tejas Mk1A और Mk2 को लेकर एक बेहद बड़ी और अच्छी खबर आई है। तेजस को अब ऐसे आधुनिक वेपन सिस्टम से लैस करने की तैयारी है, जो दुश्मन के इलाके में घुसकर अचूक वार करने में सक्षम है। इसे ‘देसी राफेल’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह फ्रांस के राफेल जेट जितना ही घातक है, लेकिन कीमत में उससे काफी किफायती है।
भारतीय वायुसेना (IAF) अपने लड़ाकू बेड़े में दुनिया की सबसे एडवांस मैन्ड-अनमैन्ड टीमिंग (MUM-T) तकनीक को शामिल करने जा रही है। इस तकनीक के तहत मानव संचालित तेजस विमान हवा में उड़ते हुए रोबोटिक ड्रोन और विंगमैन को कंट्रोल करेंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि हमारे पायलट दुश्मन की एयर डिफेंस रेंज से सुरक्षित दूरी पर रहेंगे, जबकि ड्रोन आगे बढ़कर दुश्मन के ठिकानों को तबाह कर देंगे।
पहले चरण में ‘कामिकाजे ड्रोन’ का इंटीग्रेशन
योजना के पहले चरण में तेजस Mk1A और आगामी तेजस Mk2 में एयर लॉन्च्ड लॉयटरिंग म्यूनिशंस (कामिकाजे ड्रोन) को इंटीग्रेट किया जाएगा। इन आत्मघाती ड्रोन्स की रेंज 150 से 300 किलोमीटर तक होगी। फाइटर जेट से ऊंचाई पर छोड़े छोड़े जाने के कारण ये बहुत दूर तक ग्लाइड कर सकेंगे। इससे दुश्मन के रडार को संभलने का मौका ही नहीं मिलेगा।
दूसरे चरण में तेजस एक उड़ते हुए कमांड सेंटर की तरह काम करेगा, जो कैट्स वॉरियर जैसे रोबोटिक विंगमैन को नियंत्रित करेगा। ये ड्रोन केवल आत्मघाती हथियार नहीं होंगे, बल्कि इंटेलिजेंट साथी की तरह काम करेंगे।
इनकी ऑपरेशनल रेंज 400 से 600 किलोमीटर तक होगी। ये आक्रामक हमले करने के साथ-साथ तेजस विमान की सुरक्षा भी करेंगे।
अस्त्र मिसाइल और उत्तम रडार की ताकत
इन रोबोटिक ड्रोन्स को भारत की स्वदेशी हवा से हवा में मार करने वाली ‘अस्त्र’ Astra MK-1 मिसाइल से भी लैस किया जा सकता है। इसके अलावा, तेजस में लगा स्वदेशी उत्तम रडार AESA Radar और AWACS सिस्टम इन ड्रोन्स को बिना अपना सेंसर ऑन किए भी दूर बैठे सटीक टारगेट की जानकारी देते रहेंगे।