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भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस की गोली लगने से एक युवक की मौत का मामला गरमा गया है। ‘भगवान परशुराम जयंती आयोजन समिति’ के अध्यक्ष विजय तिवारी ने इस घटना पर गहरा दुख और रोष व्यक्त करते हुए पुलिस प्रशासन पर हत्या का आरोप लगाया है। तिवारी ने इस घटना को पुलिस एनकाउंटर नहीं, बल्कि एक बेकसूर की ‘हत्या’ करार दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस बर्बरता पर चुप नहीं बैठेगे और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने पुलिस के उन दावों का खंडन किया, जिनमें युवक को मानसिक रोगी या अपराधी साबित करने की कोशिश की जा रही थी। तिवारी ने स्पष्ट किया कि मृतक युवक अपराधी नहीं, बल्कि समाज की एक बुलंद आवाज था। मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन बताया तिवारी ने पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए सवाल उठाया कि यदि कोई व्यक्ति आत्मसमर्पण कर चुका था और उसने अपने हथियार भी फेंक दिए थे, तो उसके बाद पुलिस द्वारा उसे गोली मार देना किस कानून के तहत सही है। उन्होंने इसे न्याय व्यवस्था और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन बताया। मृतक युवक पूरे बिहार के युवाओं में लोकप्रिय था और समाज के मुद्दों पर सक्रिय रूप से आवाज उठाता था। वह विशेष रूप से पड़ोसी गांव जवईनिया के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए संघर्ष कर रहा था। पिछले साल आई भयंकर बाढ़ में जवईनिया गांव का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा गंगा नदी में समा गया था, जिससे ग्रामीण विस्थापित हो गए थे। युवक इन विस्थापितों के पुनर्वास के लिए सरकार से जमीन और घर बनाने के लिए अनुदान मुहैया कराने की मांग कर रहा था। समिति अध्यक्ष ने कहा कि भले ही उसके आवाज उठाने का तरीका कुछ लोगों को गलत लगा हो, लेकिन वह समाज के लिए संघर्ष कर रहा था और उसके उठाए गए मुद्दे सही थे। इस घटना के बाद पूरे बिहार के युवाओं में काफी आक्रोश देखा जा रहा है। दोषी के खिलाफ हम कार्रवाई की मांग करेंगे यह घोर अपराध हुआ है वह कहीं से भी अपराधिक नहीं था नाही उसका कोई प्रमाण है।उन्होंने कहा कि हमारी यह नैतिक बीमारी है कि हम उस आवाज को यहां से लेकर वहां तक बुलंद करें हमारी एक टीम वहां जाएगी और अपनी संवेदना प्रकट करेगी और उसे पूरे मामले की तहकीकात करते हुए जांच करते हुए उसकी दोषी के खिलाफ हम कार्रवाई की मांग करेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। समिति के अध्यक्ष ने सरकार के सामने प्रमुख मांगें रखते हुए घटना में शामिल और गोली चलाने वाले दोषी पुलिसकर्मियों पर तुरंत हत्या का मामला दर्ज किया जाए। मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को अविलंब गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए। इस पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए ताकि सच सामने आ सके। उनका कहना है कि पुलिस अपनी नाकामी छुपाने के लिए इस तरह की कायराना हरकतों को एनकाउंटर का रूप दे देती है। हम सब पीड़ित परिवार के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि सरकार और प्रशासन ने जल्द ही दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की, तो यह आक्रोश सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं रहेगा। न्याय की मांग को लेकर पूरे राज्य में चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
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