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मिडिल ईस्ट संकट के बावजूद की रफ्तार से दौड़ी भारत की अर्थव्यवस्था सरकार ने जारी किए के आंकड़े…



सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए शुरुआती अनुमान जारी किए। रियल GDP ₹323.12 लाख करोड़ तक पहुंच गई, जो पिछले वित्त वर्ष में दर्ज 7.1% की ग्रोथ से लगातार बढ़ोतरी को दिखाता है। इसी दौरान नॉमिनल GDP में भी 8.9% की ग्रोथ देखी गई।

इसके मुख्य कारण सेकेंडरी और टर्शियरी सेक्टर थे। टर्शियरी सेक्टर, जिसमें फाइनेंस, रियल एस्टेट और ट्रेड जैसी सर्विस शामिल हैं, ने स्थिर कीमतों पर 9.3% की शानदार ग्रोथ दर्ज की। सेकेंडरी सेक्टर ने भी, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन शामिल हैं, 8.8% की ग्रोथ रेट हासिल की।

इंडस्ट्रियल सेक्टर में कई सेगमेंट ने डबल-डिजिट ग्रोथ हासिल की। ​​इसमें मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के साथ-साथ फाइनेंशियल, प्रोफेशनल और ट्रांसपोर्ट से जुड़ी सर्विस शामिल हैं। वहीं, एग्रीकल्चर और फिशरी वाले प्राइमरी सेक्टर में 3.2% की ग्रोथ रेट देखी गई, जिससे पूरी इकॉनमी को एक मजबूत आधार मिला।

वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही ने सालाना परफॉर्मेंस को मजबूती के साथ पूरा किया। जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में रियल GDP में 7.8% की ग्रोथ हुई। इस दौरान निवेश की गतिविधियां काफी मजबूत रहीं और स्थिर कीमतों पर ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन (GFCF) में 10.8% की ग्रोथ रेट दर्ज की गई। प्राइवेट फाइनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर भी मजबूत बना रहा और इसमें 7.1% की बढ़ोतरी हुई।

ये आंकड़े व्यापक आर्थिक रिकवरी और विस्तार के दौर को दिखाते हैं। चूंकि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस-आधारित ग्रोथ पर ध्यान देना जारी रखे हुए है, इसलिए डेटा से पता चलता है कि इकॉनमी आने वाली तिमाहियों में भी अपनी मौजूदा रफ्तार बनाए रखने की अच्छी स्थिति में है।



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