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अररिया में करोड़ का पुल धंसा साल में ही कमजोर हुआ आवागमन पर बढ़ा खतरा कई गांवों के लिए लाइफलाइन…




अररिया जिले में परमान नदी पर बना झमटा-महिषाकोल पुल धंस गया है। करीब 7 करोड़ 32 लाख रुपये की लागत से वर्ष 2022 में बने इस पुल का पाया धंसने से रेलिंग में दरारें आ गई हैं और पुल की संरचना कई जगह कमजोर हो गई है। इससे क्षेत्र में दहशत का माहौल है और लोगों को किसी बड़े हादसे की आशंका सता रही है। फिलहाल पुल पर आवाजाही जारी है, लेकिन उसकी स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। यह पिछले डेढ़ साल में जिले में पुल धंसने की चौथी घटना है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने ग्रामीण कार्य विभाग की निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई गांवों के लिए लाइफलाइन है यह पुल
206.72 मीटर लंबे इस पुल का निर्माण अररिया और फारबिसगंज प्रखंड के कई गांवों को जोड़ने के लिए किया गया था। पुल बनने के बाद लोगों को आवागमन में काफी राहत मिली थी और क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए यह महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग बन गया था। लेकिन अब पुल के बीच का पाया धंसने के बाद इसकी मजबूती पर सवाल उठने लगे हैं। जिला पार्षद ने डीएम को भेजा वीडियो, विभाग ने शुरू की जांच
क्षेत्रीय जिला पार्षद सबा फैसल ने पुल धंसने का वीडियो और आवेदन जिलाधिकारी विनोद दूहन को भेजकर मामले की जानकारी दी। इसके बाद ग्रामीण कार्य विभाग के सहायक अभियंता ने मौके पर पहुंचकर पुल का निरीक्षण किया और अपनी रिपोर्ट कार्यपालक अभियंता को सौंप दी है। विभाग की ओर से एहतियातन पुल पर भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए बैरियर और चेतावनी बोर्ड लगाए जा रहे हैं, ताकि पुल पर दबाव कम किया जा सके। निर्माण के दौरान भी उठे थे गुणवत्ता पर सवाल
सामाजिक कार्यकर्ता फैसल जावेद यासीन ने बताया कि पुल निर्माण के दौरान भी कार्य की गुणवत्ता को लेकर कई बार शिकायत की गई थी। ग्रामीणों ने भी निर्माण में घटिया सामग्री इस्तेमाल होने का आरोप लगाते हुए काम रोकने की कोशिश की थी, लेकिन शिकायतों को नजरअंदाज कर निर्माण जारी रखा गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में भारी अनियमितता हुई, जिसका परिणाम अब पुल की जर्जर स्थिति के रूप में सामने आ रहा है। जिला पार्षद सबा फैसल ने डीएम से पुल की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कार्यपालक अभियंता बोले- डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड में है पुल
ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर प्रसाद ने बताया कि पुल के पाया धंसने की जानकारी मिलने के बाद जांच कराई गई है। उन्होंने कहा कि झमटा-महिषाकोल पुल अभी डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड में है और संवेदक को पत्र भेजा जा रहा है। साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर भारी वाहनों की आवाजाही रोकने की कार्रवाई की जा रही है। पहले भी सामने आ चुके हैं पुल धंसने के मामले
अररिया जिले में इससे पहले भी कई पुलों को लेकर गंभीर विवाद और हादसे सामने आ चुके हैं। नवंबर 2025 में फारबिसगंज प्रखंड के कौआचार में करीब 4 करोड़ रुपये की लागत से बना पुल धंस गया था। यह पुल वर्ष 2019 में बनाया गया था, लेकिन कुछ ही वर्षों में उसका पाया कमजोर पड़ गया। इसके अलावा 18 जून 2024 को सिकटी प्रखंड के पड़रिया घाट पर बकरा नदी पर बना 12 करोड़ रुपये का पुल उद्घाटन से पहले ही गिर गया था। पुल के तीन पिलर नदी में धंस गए थे और पूरी संरचना ध्वस्त हो गई थी। रानीगंज प्रखंड में खेत के बीच पुल निर्माण का मामला भी काफी चर्चा में रहा था, जिससे सरकार और विभाग दोनों की किरकिरी हुई थी। खास बात यह है कि जिले के इन सभी पुलों का निर्माण ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से कराया गया था। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के बाद अब विभाग की कार्यशैली और निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।



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