Newswahni

राजगीर मलमास मेला में उमड़ा आस्था का सैलाब गाय की पूंछ पकड़कर श्रद्धालुओं ने पार की वैतरणी मोक्ष की कामना चप्पे चप्पे पर…




ऐतिहासिक और पौराणिक नगरी राजगीर में आयोजित विश्व प्रसिद्ध मलमास मेले के दूसरे दिन सोमवार को आस्था का एक अनूठा नजारा देखने को मिला। पुरुषोत्तम मास के इस पावन अवसर पर देश-विदेश से आए करीब 80 हजार श्रद्धालुओं के जनसैलाब से पूरी धर्मनगरी धर्ममय हो उठी। सुबह से ही पवित्र कुंडों और नदियों में स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। चारों तरफ भक्ति का माहौल नजर आया। इस दौरान सबसे अद्भुत और आकर्षक दृश्य पवित्र वैतरणी नदी के तट पर देखने को मिला, जहां सदियों पुरानी सनातन परंपरा को जीवंत करते हुए हजारों श्रद्धालुओं ने गाय की पूंछ पकड़कर नदी पार की और अपने जीवन के लिए मोक्ष की कामना की। सनातन परंपरा का निर्वहन और मोक्ष की अनूठी चाह धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सनातन धर्म में वैतरणी नदी को पौराणिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसी मान्यता है कि मृत्यु के पश्चात आत्मा को परलोक जाते समय वैतरणी नदी पार करनी पड़ती है। गाय को इस भवसागर से पार लगाने वाली मोक्षदायिनी माना गया है। इसी अटूट विश्वास के साथ सुबह से लेकर देर शाम तक वैतरणी तट पर महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की लंबी कतारें लगी रही। महिलाओं में इस अनुष्ठान को लेकर विशेष उत्साह देखा गया, जिनका मानना है कि इस विधि-विधान से परिवार में सुख-समृद्धि आती है और जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है। पुरोहितों के अनुसार पुरुषोत्तम मास में किया गया कोई भी जप, तप, दान और स्नान सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी होता है, जिससे इस परंपरा का महत्व और भी बढ़ जाता है। श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा मेले के दूसरे दिन ब्रह्ममुहूर्त से ही राजगीर की फिजां पूरी तरह बदल चुकी थी। तड़के तीन बजे से ही श्रद्धालुओं की टोली ब्रह्मकुंड, सप्तधारा, सूर्यकुंड और पवित्र सरस्वती नदी की ओर बढ़ने लगी थी। सुबह चार बजते-बजते कुंडों के रास्तों पर बने जिग-जैग बैरिकेडिंग में कतारें इतनी लंबी हो गईं कि पैर रखने की जगह नहीं बची। पूरे मेला क्षेत्र में ‘हर-हर महादेव’ और ‘राधे-राधे’ के गगनभेदी जयघोष गूंजते रहे, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया। दोपहर के समय तीखी धूप और उमस भरी गर्मी के कारण कुछ देर के लिए भीड़ की रफ्तार जरूर थमी, लेकिन जैसे ही सूरज ढला, शाम होते ही कुंडों पर एक बार फिर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। मठ-मंदिरों में चौबीस घंटे महाभंडारा इतनी भारी भीड़ के बावजूद इस बार मेला क्षेत्र में प्रशासन की सक्रियता और मुस्तैदी साफ तौर पर देखने को मिल रही है। भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा, साफ-सफाई से लेकर पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रशासनिक स्तर पर पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। चप्पे-चप्पे पर दंडाधिकारियों और पुलिस बल की तैनाती के साथ ही सीसीटीवी कैमरों से पूरी गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने भी प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जमकर तारीफ की। राजगीर के तमाम मठ-मंदिरों में भी रौनक बढ़ गई है। झुमकी बाबा मंदिर, फलाहारी बाबा आश्रम, कैलाश आश्रम, हनुमानगढ़ी, कबीर मठ और रजौली संगत जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए चौबीस घंटे मुफ्त महाभंडारे का संचालन किया जा रहा है, जहां दिन-रात लोग पूरे प्रेमभाव से प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं।



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

🏠
Home
🎬
मनोरंजन
💰
धन
🌦️
मौसम
📢
Latest News
×
Scroll to Top