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जमुई में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकारी दावों की पोल खोलती एक तस्वीर सामने आई है। जिला मुख्यालय से महज कुछ दूरी पर नगर परिषद क्षेत्र के कल्याणपुर मोहल्ले स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय कल्याणपुर की हालत बद से बदतर बनी हुई है। सबसे हैरानी की बात यह है कि यह विद्यालय जिलाधिकारी कार्यालय, जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय समेत कई प्रशासनिक दफ्तरों से चंद कदम की दूरी पर स्थित है, इसके बावजूद यहां पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएं भगवान भरोसे हैं। विद्यालय में करीब 250 छात्र-छात्राओं का नामांकन है, जबकि यहां 6 से 7 शिक्षक कार्यरत हैं। बच्चों की संख्या को देखते हुए स्कूल परिसर में आठ क्लासरूम बनाए गए हैं, लेकिन इनमें से पांच कमरे पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। कहीं छत से पानी टपकता है तो कहीं दीवारों का प्लास्टर और मलबा गिर रहा है। बरसात के दिनों में स्थिति और भयावह हो जाती है। जर्जर कमरों में पढ़ाई करने को मजबूर बच्चे स्कूल में पढ़ने वाले मासूम बच्चे जान जोखिम में डालकर इन्हीं कमरों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। बारिश के दौरान क्लासरूम के अंदर पानी भर जाता है और बच्चों को सुरक्षित जगह पर बैठाना भी मुश्किल हो जाता है। विद्यालय के एक छात्र ने बताया, “क्लास में पढ़ते समय हमेशा डर लगता है कि कहीं छत का प्लास्टर गिर न जाए। बारिश होने पर कमरे के अंदर पानी आने लगता है, जिससे पढ़ाई करना मुश्किल हो जाता है।” छात्र-छात्राओं का कहना है कि उनके अभिभावक आर्थिक रूप से कमजोर हैं और निजी स्कूलों में पढ़ाने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में सरकारी विद्यालय ही उनका सहारा है, लेकिन यहां भी वे डर के साए में पढ़ाई करने को विवश हैं। विभाग को कई बार भेजा गया पत्र विद्यालय के प्रधानाध्यापक संजीव कुमार सिन्हा ने बताया कि जर्जर भवन को लेकर कई बार विभाग को लिखित रूप से सूचना दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा, “बरसात के समय स्थिति और खराब हो जाती है। बच्चों को सुरक्षित स्थान पर बैठाना चुनौती बन जाता है। शिक्षक और छात्र दोनों भय के माहौल में पढ़ाई कर रहे हैं। कई बार विभाग को पत्र भेजा गया, लेकिन आज तक कोई पहल नहीं हुई।” शिक्षा विभाग पर उठे सवाल विद्यालय की स्थिति को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। एक ओर सरकार शिक्षा सुधार, स्मार्ट क्लास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करती है, वहीं जिला मुख्यालय के बीचों-बीच स्थित इस स्कूल की बदहाली प्रशासनिक दावों की हकीकत बयान कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब अधिकारियों के कार्यालय के आसपास स्थित विद्यालय की यह स्थिति है, तो ग्रामीण इलाकों के स्कूलों की हालत का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। डीईओ बोले- जानकारी नहीं है पूरे मामले में जब दयाशंकर से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है और विभाग को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि जब विद्यालय प्रशासन द्वारा कई बार लिखित शिकायत दी जा चुकी है, तो विभाग अब तक अनजान कैसे बना हुआ है। इतना ही नहीं, बाद में संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन उठाना भी जरूरी नहीं समझा। हादसे के इंतजार में विभाग? स्कूल की जर्जर स्थिति को देखते हुए अभिभावकों और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत या नए भवन की व्यवस्था नहीं की गई, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। अब देखने वाली बात होगी कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं। कहीं ऐसा न हो कि किसी बड़े हादसे के बाद ही विभाग की नींद खुले और मामला केवल जांच व आश्वासन तक सीमित रह जाए।
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