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मासूम बहनों को मामा ने ट्रेन में बिठाया कहा जहां जाना है जाओ रोती बिलखती पहुंची बेगूसराय पिता की मौत के बाद मां…




बेगूसराय के लखनियां रेलवे स्टेशन से 2 मासूम बहनें लावारिस हालत में मिली हैं। रेल पुलिस ने दोनों बच्चियों लावारिस हालत में रोते-बिलखते बरामद किया है। पिता इस दुनिया में नहीं है। मौत के बाद मां ने दूसरी शादी कर ली।
रही-सही कसर मामा और ननिहाल वालों ने पूरी कर दी। जिन्होंने इन अनाथ बच्चियों को बोझ समझा और हाथ में कपड़ों का झोला थमाकर चलती ट्रेन में बैठा दिया। यह पूरी दर्दनाक दास्तां तब उजागर हुई जब रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ (RPF) की टीम ने दो छोटी बच्चियों को लावारिस हालत में रोते-बिलखते और भटकते हुए पाया। लखमिनियां स्टेशन पर भटक रही थी दो मासूम बहनें बुधवार की ढलती शाम लखमिनियां रेलवे स्टेशन पर आम दिनों की तरह यात्रियों की चहल-पहल थी। इसी बीच प्लेटफॉर्म पर दो छोटी बच्चियां, जिनकी उम्र महज 10 और 7 साल है, हाथ में कपड़ों का एक झोला लिए बदहवास हालत में घूम रही थी। उनके चेहरों पर खौफ और आंखों में आंसू थे। स्टेशन पर गश्त कर रही रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की नजर इन बच्चियों पर पड़ी। बेगूसराय के आरपीएफ निरीक्षक सह पोस्ट कमांडर अरविंद कुमार सिंह ने तत्परता दिखाते हुए बच्चियों को अपने संरक्षण में लिया और उनसे पूछताछ शुरू की। जब बड़ी बहन ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई, तो वहां मौजूद पुलिसकर्मियों की आंखें भी नम हो गई। ‘पापा मर गए, मम्मी भाग गई और मामा ने ट्रेन में बिठा दिया’ पूछताछ में बड़ी लड़की ने अपना नाम प्रीति कुमारी (10 वर्ष) और अपनी छोटी बहन का नाम श्वेता कुमारी (7 वर्ष) बताया। बच्चियों ने बताया कि वे मूल रूप से भागलपुर जिले के जगदीशपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली है। 2 साल पहले हमारे पापा की मौत हो गई थी। पापा के जाने के बाद घर की पूरी दुनिया ही बदल गई। मां बहुत परेशान करने लगी और कुछ ही दिनों के बाद उसने दूसरी शादी कर ली और हमें छोड़कर चली गई। हम दोनों बहनें इस दुनिया में बिल्कुल अनाथ हो गई। बच्चियों ने बताया कि जब ननिहाल वालों को इस बात की भनक लगी, तो मामा और नाना उनके घर आए। वे दोनों बहनों को सांत्वना देकर अपने साथ अपने गांव (ननिहाल) ले गए। प्रीति ने बताया कि ननिहाल जाने के बाद शुरुआती छह महीनों तक तो सब कुछ ठीक-ठाक रहा। मामा और बाकी परिजनों ने उन्हें प्यार दिया। लेकिन धीरे-धीरे वक्त बदला और वे दोनों बहनें ननिहाल के लोगों की आंखों में खटकने लगी। मासूम प्रीति के अनुसार उसके मामा-मामी उन्हें परेशान करते थे और बात-बात पर तीखे ताने देती थी। जब बच्चियां इसकी शिकायत अपने नाना से करती थी, तो वृद्ध होने के कारण नाना उनकी बातों पर ध्यान नहीं दे पाते थे। धीरे-धीरे ननिहाल में दोनों बहनों का जीना मुहाल कर दिया गया। रोज-रोज के इस मानसिक और शारीरिक शोषण से दोनों मासूम हर दिन घुट-घुट कर जीने को मजबूर थीं। मामा ने कहा- ‘जहां जाना है जाओ’ बुधवार का दिन इन बच्चियों के जीवन का सबसे भयानक मोड़ साबित हुआ। प्रीति ने बताया कि बुधवार को मामा दोनों बहनों को लेकर भागलपुर रेलवे स्टेशन पहुंचा। मामा के हाथ में एक झोला था, जिसमें दोनों बहनों के कुछ पुराने कपड़े ठूंस कर रखे गए थे। मामा ने दोनों बच्चियों को जबरन एक ट्रेन में बैठा दिया और बेरहमी से कहा- तुम दोनों को जहां जाना है जाओ, अब यहां मत आना। इतना कहकर मामा उन्हें चलती ट्रेन में छोड़कर गायब हो गया। दोनों डरी-सहमी बहनें ट्रेन में बैठी रहीं। ट्रेन काफी देर तक चलती रही और जब उन्हें कुछ समझ नहीं आया, तो वे बेगूसराय के लखमिनियां स्टेशन पर उतर गई। स्टेशन पर उतरकर वे काफी देर तक भटकती रही कि अब वे कहां जाएं और किसका दरवाजा खटखटाएं। लेकिन कोई मदद करने वाला नहीं दिख रहा था, तभी पुलिस पहुंच गई। इंस्पेक्टर बोले- मां ने नहीं उठाया फोन आरपीएफ के निरीक्षक सह पोस्ट कमांडर अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि स्टेशन पर संदिग्ध अवस्था में घूमती पाई गईं दोनों बच्चियों को तुरंत सुरक्षा में लिया गया। बच्चियों से मिली जानकारी के आधार पर आरपीएफ टीम ने उनकी मां के मोबाइल नंबर पर कई बार संपर्क करने का प्रयास किया। लेकिन दूसरी तरफ से कोई रिस्पांस नहीं मिला। आरपीएफ चला रहा है नन्हें फरिश्ते अभियान आरपीएफ इंस्पेक्टर ने बताया कि ‘नन्हें फरिश्ते’ अभियान पूरे देश में चलाया जा रहा है। घर, स्कूल से भागे बच्चे, मारपीट कर भगाए गए बच्चे या किसी कारण हॉस्टल, घर से भागे बच्चों का रेस्क्यू किया जाता है। समाज के चेहरे पर तमाचा है यह घटना यह घटना हमारे आधुनिक समाज के मुंह पर एक करारा तमाचा है। जहां एक तरफ बच्चों को भगवान का रूप माना जाता है, वहीं दूसरी तरफ चंद स्वार्थों और नए रिश्तों की खातिर सगे मामा ने इन मासूमों को लावारिस हालत में ट्रेन पर छोड़ दिया। अगर समय रहते आरपीएफ की नजर इन बच्चियों पर न पड़ती, तो मानव तस्करी या किसी बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता था। फिलहाल रेल पुलिस और CWC बच्चियों का भविष्य सुरक्षित करने के प्रयासों में जुट गई है।



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