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सुपौल जिले के निर्मली में मानवता, सेवा और त्याग की प्रेरणादायी मिसाल देखने को मिली। दधीचि देहदान समिति के जागरूकता अभियान के तहत निर्मली में पहली बार नेत्रदान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। जैन श्वेतांबर तेरापंथी समाज के 51 वर्षीय हर्ष कुमार नाहर के निधन के बाद उनके परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए नेत्रदान कराया। इस महादान से दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में रोशनी आने की उम्मीद जगी है। सीढ़ियों पर गिरने से गई जान हर्ष कुमार नाहर चाय पीकर घर से निकले थे। इसी दौरान घर की सीढ़ियों पर गिर पड़े। परिजन उन्हें तत्काल पास के एक नर्सिंग होम ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक तौर पर हृदयाघात की आशंका जताई गई। शोक की इस घड़ी में उनकी धर्मपत्नी ममता देवी नाहर, पिता बनेचंद नाहर और माता लीला देवी नाहर ने साहस का परिचय देते हुए हर्ष कुमार नाहर की पूर्व में व्यक्त नेत्रदान की इच्छा को पूरा करने का निर्णय लिया। इस दौरान उनका 10 वर्षीय बेटे काव्य नाहर भी मौजूद था। परिवार के इस निर्णय की सभी ने सराहना की। डॉक्टर के सहयोग से किया गया नेत्र संकलन नेत्रदान की सूचना मिलते ही अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के राज्य नेत्रदान प्रभारी आशीष गोलछा, मुकेश कुमार नाहर, अर्पित सुराना, दधीचि देहदान समिति, फारबिसगंज के अध्यक्ष अजातशत्रु कुमार तथा समिति के क्षेत्रीय मंत्री मनमोहन सरावगी सक्रिय हुए। उनके प्रयास पर डीएमसीएच के नेत्र विभागाध्यक्ष डॉ. आसिफ शाहनवाज और आई बैंक प्रभारी डॉ. रणधीर कुमार के निर्देशन में डॉ. रेणु के नेतृत्व में आई बैंक की टीम निर्मली पहुंची। टीम ने डॉ. नीरज, डॉ. रजनीश, सिस्टर अर्पणा सिंह और सहायक शशि रंजन के सहयोग से सफलतापूर्वक नेत्र संकलन किया। श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा निर्मली के पूर्व अध्यक्ष तरुण कुमार जैन ने कहा कि समाज के लिए उनका ऐसे ही चला जाना अपूरणीय क्षति है, साथ उन्होंने जाते-जाते बड़ा मिसाल देकर गए हैं।
नेत्रदान के दौरान तेरापंथ सभा के पूर्व अध्यक्ष बाबूलाल सुराणा सहित बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा की पूरी बाबूलाल सुराणा ने कहा कि हर्ष कुमार नाहर की पहले से ही इच्छा थी कि मृत्यु के बाद उनके नेत्र दान किए जाएं। परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान कर समाज के लिए एक अविस्मरणीय और प्रेरणादायी पहल की है। स्थानीय मुकेश नाहर ने कहा कि हर्ष कुमार नाहर अपने पीछे ऐसा संदेश छोड़ गए हैं, जो पूरे समाज को नेत्रदान और अंगदान के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति का नेत्रदान दो नेत्रहीनों के जीवन में नई रोशनी ला सकता है। दधीचि देहदान समिति के क्षेत्रीय मंत्री मनमोहन सरावगी ने बताया कि यह निर्मली का पहला तथा समिति के माध्यम से संपन्न 34वां नेत्रदान है। उन्होंने कहा कि दरभंगा से निर्मली पहुंचकर डीएमसीएच आई बैंक की टीम ने जिस समर्पण और सेवा भावना के साथ कार्य किया, वह सराहनीय है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस पहल से समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता और विश्वास दोनों बढ़ेंगे।
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