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भागलपुर जिले में गंभीर मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ी पहल की जा रही है। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में अगले एक माह के अंदर 40 बेड का अत्याधुनिक आईसीयू (इंटेंसिव केयर यूनिट) शुरू किया जाएगा। जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (मायागंज) के प्राचार्य की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। नई व्यवस्था के तहत वर्तमान में मायागंज अस्पताल में संचालित 24 बेड के आईसीयू के स्टाफ को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में ट्रांसफर किया जाएगा, ताकि वहां आईसीयू का संचालन सुचारु रूप से किया जा सके। अस्पताल प्रशासन की योजना के अनुसार गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद एंबुलेंस के माध्यम से आईसीयू में भर्ती कराया जाएगा। इसके लिए अलग से एंबुलेंस की व्यवस्था भी की जाएगी। मरीज की स्थिति में सुधार होने और सामान्य होने के बाद उसे फिर मायागंज के जनरल वार्ड में लाया जाएगा। एक जुलाई से नई व्यवस्था नई व्यवस्था लागू होने के बाद मायागंज में खाली होने वाले 16 आईसीयू बेड को गायनी विभाग को उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे महिला मरीजों को अतिरिक्त सुविधा मिल सकेगी। वहीं, आठ बेड पीकू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) के लिए पूर्ववत संचालित रहेंगे। अस्पताल प्रशासन एक जुलाई से इस नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारी में जुटा है। इसके लिए आवश्यक संसाधनों और मानवबल की व्यवस्था भी की जा रही है, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। मरीजों को मिलेगी बेहतर सुविधा जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के प्राचार्य डॉ. संदीप लाल ने बताया कि सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में 40 बेड का आईसीयू शुरू होने से गंभीर मरीजों के इलाज की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। वर्तमान में अस्पताल के आईसीयू पर मरीजों का अत्यधिक दबाव रहता है, जिसे कम करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। आधुनिक सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता के कारण गंभीर मरीजों को और बेहतर उपचार मिल सकेगा। अस्पताल प्रशासन की प्राथमिकता मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसी उद्देश्य से चरणबद्ध तरीके से स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद न केवल आईसीयू सेवाएं मजबूत होंगी, बल्कि गायनी और शिशु रोग विभाग को भी अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे, जिससे अधिक संख्या में मरीजों का बेहतर इलाज संभव हो सकेगा।
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