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सहरसा में स्टेडियम के प्रस्तावित विकास को लेकर नया विवाद सामने आया है। पहले इसे फुटबॉल मैदान और एथलेटिक्स ट्रैक के रूप में विकसित करने की योजना थी, लेकिन अब इसे तीरंदाजी (आर्चरी) ग्राउंड बनाने की चर्चा है। इस बदलाव से खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में असंतोष है। एथलेटिक्स और फुटबॉल की मजबूत संभावनाएं राष्ट्रीय स्तर के एथलेटिक्स खिलाड़ी सोनू कुमार ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने बताया कि उन्होंने वर्ष 2025 में ईस्ट जोन में बिहार का प्रतिनिधित्व किया है। सोनू कुमार के अनुसार, सहरसा में एथलेटिक्स और फुटबॉल की मजबूत संभावनाएं हैं, जबकि तीरंदाजी का यहां न तो कोई इतिहास है और न ही खिलाड़ी। उन्होंने कहा कि एथलेटिक्स और फुटबॉल में बड़ी संख्या में युवा सक्रिय हैं, लेकिन मैदान के अभाव में वे आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। फुटबॉल खिलाड़ी सूरज कुमार ने भी अपनी असहमति जताते हुए कहा कि वे बचपन से इसी मैदान में खेलते आए हैं और सहरसा में फुटबॉल का अच्छा भविष्य है। उन्होंने प्रशासन से पूर्व योजना के अनुसार ही स्टेडियम का विकास करने की उम्मीद जताई। डीएम को आवेदन देकर पूर्व प्रस्ताव लागू करने की मांग स्थानीय खिलाड़ी सुरेश कुमार ने बताया कि यह मैदान वर्षों से फुटबॉल और दौड़ जैसे खेलों का केंद्र रहा है। खिलाड़ियों का कहना है कि तीरंदाजी मैदान बनाने की अचानक योजना से वे निराश हैं। खिलाड़ियों ने जिला पदाधिकारी (डीएम) को आवेदन देकर पूर्व प्रस्ताव को ही लागू करने की मांग की है। खेल प्रतिनिधि रोशन सिंह ‘धोनी’ ने कहा कि कोसी क्षेत्र में तीरंदाजी की संभावनाएं सीमित हैं। इसके विपरीत, यहां के खिलाड़ी एथलेटिक्स और फुटबॉल में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से खिलाड़ियों के हित में निर्णय लेने की अपील की। उन्होंने बताया कि 16 खेल संगठनों ने संयुक्त रूप से डीएम को एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में स्टेडियम को एथलेटिक्स ट्रैक और फुटबॉल मैदान के रूप में विकसित करने, खेल छात्रावास बनाने और मल्टीपरपज हॉल को इंडोर स्टेडियम में बदलने का सुझाव दिया गया है। अब सभी की निगाहें प्रशासन के अगले फैसले पर टिकी हैं।
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