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सहरसा सदर अस्पताल में मेडिको-लीगल जांच व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। अस्पताल के एकमात्र पैथोलॉजिस्ट डॉ. देव कुमार देव के 18 जून से लंबी छुट्टी पर चले जाने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। अपहरण, यौन उत्पीड़न और अन्य संवेदनशील मामलों में आवश्यक स्वाब सैंपल की जांच नहीं हो पा रही है, जिसके चलते पीड़ितों को जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, मधेपुरा भेजा जा रहा है। स्वाब सैंपल का संग्रहण एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया मेडिको-लीगल जांच में अपहरण या यौन अपराध से जुड़े पीड़ितों का चिकित्सकीय परीक्षण किया जाता है। इसमें स्वाब सैंपल का संग्रहण एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जो पुलिस अनुसंधान और न्यायिक कार्रवाई में वैज्ञानिक साक्ष्य के रूप में अहम भूमिका निभाती है। यह रिपोर्ट कई बार घटना की पुष्टि या खंडन का आधार बनती है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में समय पर सैंपल संग्रह अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि देरी से महत्वपूर्ण जैविक साक्ष्य नष्ट हो सकते हैं। मेडिको-लीगल जांच अनिवार्य जिले में अपहृत व्यक्तियों की मेडिकल जांच केवल सरकारी अस्पतालों में ही की जाती है, क्योंकि निजी अस्पतालों में इसकी अनुमति नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सहरसा में हर महीने औसतन 40 से 50 ऐसे मामले आते हैं जिनमें मेडिको-लीगल जांच अनिवार्य होती है। वर्तमान स्थिति में पीड़ितों और उनके परिजनों को पहले सहरसा में पुलिस और अस्पताल की औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं, जिसके बाद उन्हें जांच के लिए मधेपुरा की यात्रा करनी पड़ती है। इससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक, मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों को मधेपुरा मेडिकल कॉलेज भेजा जा रहा सदर अस्पताल की पैथोलॉजी सेवाएं पहले से ही विशेषज्ञों की कमी से जूझ रही हैं। पैथोलॉजिस्ट के दो स्वीकृत पदों में से एक रिक्त है, और माइक्रोबायोलॉजिस्ट का पद भी लंबे समय से खाली पड़ा है। अस्पताल में आधुनिक जांच उपकरण उपलब्ध हैं, लेकिन विशेषज्ञों की अनुपस्थिति के कारण उनका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. हरिशेखर भारती ने बताया कि पैथोलॉजिस्ट के अवकाश पर होने के कारण मरीजों को मधेपुरा मेडिकल कॉलेज भेजा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि वैकल्पिक व्यवस्था के लिए विभाग को पत्र भेजा जाएगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिला मुख्यालय के सबसे बड़े अस्पताल में मेडिको-लीगल जैसी महत्वपूर्ण सेवा किसी एक चिकित्सक पर निर्भर नहीं रहनी चाहिए, अन्यथा इसका असर पीड़ितों के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।
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