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सहरसा में मानसून की पहली बारिश ने नगर निगम की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी है। वार्ड संख्या-31 में भीषण जलजमाव से जनजीवन प्रभावित हुआ है। सरकार के आपदा प्रबंधन और जल निकासी की तैयारियों के दावे कोसी क्षेत्र में हकीकत से दूर नजर आ रहे हैं। इसी वार्ड में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राज्यसभा सांसद प्रो. मनोज झा का पैतृक आवास स्थित है। शुक्रवार को अपने गृह क्षेत्र पहुंचने पर सांसद ने अपने आवास की गली में भरे गंदे पानी को देखकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने मौके पर ही वार्ड पार्षद आशीष रंजन को बुलाकर समस्या की विस्तृत जानकारी ली। वार्ड पार्षद आशीष रंजन ने सांसद को बताया कि उन्होंने अपने स्तर पर वार्ड की आंतरिक नालियों की सफाई करवा दी है। हालांकि, मुख्य समस्या उस बड़े नाले की है, जिससे पूरे क्षेत्र के पानी की निकासी होती है। नगर निगम बनने के बाद से इस मुख्य नाले की सफाई नहीं की गई है। पार्षद ने आरोप लगाया कि इस समस्या के समाधान के लिए नगर आयुक्त को कई बार लिखित आवेदन दिए गए। जिला पदाधिकारी (डीएम) की बैठकों में भी यह मामला उठाया गया, लेकिन अधिकारियों के उदासीन रवैये के कारण आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वार्ड पार्षद ने नगर निगम प्रशासन पर गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि निगम ने नालों की सफाई के लिए एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तीन अत्याधुनिक मशीनें खरीदी हैं। हालांकि, इन मशीनों को चलाने के लिए ऑपरेटरों की नियुक्ति नहीं की गई है। इसके परिणामस्वरूप, ये महंगी सरकारी मशीनें शो-पीस बनकर धूल फांक रही हैं, जबकि जनता जलजमाव से नरकीय जीवन जीने को विवश है। उन्होंने कहा कि प्रशांत मोर के समीप बुडको का नाला पूरी तरह बंद पड़ा हुआ है जिसकी सफाई नहीं हो सकी है। जिस वजह से जल निकासी नहीं होने से जल जमाव लग रहा है। स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश
वार्ड के लोगों का कहना है कि मानसून तो अभी शुरू ही हुआ है, और पहली ही बारिश में यदि मुख्य नाले की सफाई न होने से यह हाल है, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है। स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और नगर निगम के वरीय अधिकारियों से मांग की है कि बिना किसी देरी के मुख्य नाले की मशीन से सफाई करवाई जाए और जल निकासी के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि बरसात के दिनों में लोगों को जलजमाव की इस भीषण समस्या से राहत मिल सके।
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