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समुद्र में और ताकतवर हुआ भारत सेना को मिला युद्धपोत महेंद्रगिरि राजनाथ सिंह बोले हिंद महासागर क्षेत्र हमारा आंगन इसकी सुरक्षा हमारा कर्तव्…



भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत और मारक क्षमता में शनिवार को एक ऐतिहासिक इजाफा हुआ है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम डॉकयार्ड में आयोजित एक भव्य समारोह में स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस महेंद्रगिरि को आधिकारिक तौर पर नौसेना के बेड़े में कमीशन कर दिया है। यह भारतीय नौसेना के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 17A का छठा युद्धपोत है। इस मौके पर राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता का प्रमुख सुरक्षा साझेदार है। उन्होंने देश के समुद्री हितों की रक्षा करने और लगातार जटिल होते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में तिरंगे का गौरव बनाए रखने के लिए भारतीय नौसेना की सराहना की

रक्षा मंत्री ने हिंद महासागर क्षेत्र के रणनीतिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का 90 प्रतिशत से अधिक व्यापार समुद्री मार्गों के माध्यम से होता है। उन्होंने कहा कि देश की ऊर्जा सुरक्षा, विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और द्वीपीय क्षेत्रों की रक्षा, समुद्री सुरक्षा को भारत की आर्थिक प्रगति एवं राष्ट्रीय हितों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। रक्षा मंत्री ने इस बात पर भी बल दिया कि बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और क्षेत्र के बाहर की शक्तियों की बढ़ती मौजूदगी के मद्देनजर समुद्री निगरानी व सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “ऐसे परिदृश्य में भारतीय नौसेना हमारी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा, महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों की संरक्षा तथा पूरे क्षेत्र में भारत के रणनीतिक और राष्ट्रीय हितों की रक्षा में अहम भूमिका निभा रही है।“

‘हिंद महासागर क्षेत्र हमारा आंगन है और इसकी सुरक्षा हमारा कर्तव्‍य’

राजनाथ सिंह ने हिंद महासागर क्षेत्र में भारत को सबसे बड़ा और सबसे जिम्मेदार देश बताते हुए क्षेत्र में शांति, स्थिरता एवं सुरक्षित समुद्री वातावरण बनाए रखने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र हमारा आंगन है और इसकी सुरक्षा तथा स्थिरता सुनिश्चित करना हमारा सामूहिक कर्तव्य है। रक्षा मंत्री ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में हो रही उल्लेखनीय प्रगति पर बल देते हुए महेंद्रगिरि युद्धपोत के नौसेना में शामिल होने को भारत की बढ़ती स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता का एक और उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

उन्होंने देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने में रक्षा बलों के साहस, समर्पण एवं राष्ट्रभक्ति की सराहना की। साथ ही, सैनिकों से अपने कौशल को निरंतर निखारने, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में दक्षता हासिल करने और आधुनिक युद्ध की बदलती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए सदैव तैयार रहने का आह्वान किया। राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्तमान में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और भविष्य के संघर्ष नए तथा अप्रत्याशित रूपों में सामने आ सकते हैं। उन्होंने सैनिकों से शारीरिक और मानसिक रूप से सदैव तैयार रहने, निरंतर अपने कौशल को निखारने तथा नई प्रौद्योगिकियों में दक्षता हासिल करने का आह्वान किया।

‘भविष्य का शत्रु अतीत के दुश्मन जैसा नहीं होगा’

रक्षा मंत्री ने कहा, “कई संघर्ष ऐसे भी होते हैं, जिनमें युद्ध की औपचारिक घोषणा नहीं की जाती। भविष्य का शत्रु अतीत के दुश्मन जैसा नहीं होगा।“ उन्होंने कहा कि सरकार हमारे सैनिकों को विश्वस्तरीय हथियार, अत्याधुनिक तकनीक और सर्वोत्तम संसाधन उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। लेकिन युद्ध केवल हथियारों से नहीं जीते जाते, बल्कि उन्हें संचालित करने वाले साहसी और प्रशिक्षित सैनिक ही विजय सुनिश्चित करते हैं।



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