![]()
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद भी नितिन नवीन का फोकस अपने पुराने राजनीतिक क्षेत्र बांकीपुर विधानसभा पर लगातार बना हुआ है। इसी कड़ी में गुरुवार को पटना दौरे के दौरान वह एक के बाद एक कई महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा लेंगे। एक ओर जहां वह बांकीपुर विधानसभा में चल रही विकास योजनाओं की समीक्षा करेंगे। वहीं, दूसरी ओर आगामी विधान परिषद चुनाव और बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर भी रणनीतिक बैठक करेंगे। बांकीपुर के तीन मंडलों के साथ करेंगे समीक्षा बैठक जानकारी के अनुसार, नितिन नवीन आज बांकीपुर विधानसभा के शेष तीन मंडलों के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। इससे पहले वह सात मंडलों के साथ अलग-अलग बैठक कर विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर चुके हैं।इन बैठकों में उन्होंने सड़क, नाली, पेयजल, बिजली, पार्क, सामुदायिक भवन समेत विभिन्न योजनाओं की स्थिति की जानकारी ली थी। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद भी बांकीपुर में एक्टिव राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद भी नितिन नवीन लगातार इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि बांकीपुर विधानसभा में शुरू की गई कोई भी विकास योजना अधूरी न रहे। उनका प्रयास है कि जनता से किए गए सभी वादे तय समय सीमा के भीतर पूरे हों और लोगों को विकास कार्यों का सीधा लाभ मिले। आज होने वाली बैठक में वह बचे हुए तीन मंडलों के प्रतिनिधियों से योजनाओं की जमीनी स्थिति की जानकारी लेंगे और आवश्यक दिशा-निर्देश भी देंगे। मानसून से पहले जलजमाव पर रहेगा विशेष फोकस बैठक का एक महत्वपूर्ण एजेंडा मानसून से पहले जलजमाव की स्थिति की समीक्षा भी है। हर वर्ष बरसात के दौरान राजधानी पटना के कई इलाकों में जलजमाव की समस्या सामने आती है। इसे देखते हुए नितिन नवीन भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों से फीडबैक लेंगे। बैठक में यह भी समीक्षा की जाएगी कि किन इलाकों में सड़क निर्माण या अन्य विकास कार्यों के कारण परेशानी की आशंका है। यदि किसी क्षेत्र में नाला निर्माण अधूरा है, सड़क खुदी हुई है या जल निकासी की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, तो संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे। उद्देश्य यह है कि मानसून के दौरान बांकीपुर विधानसभा के लोगों को जलजमाव की समस्या का सामना न करना पड़े। विधान परिषद चुनाव को लेकर भी बनेगी रणनीति नितिन नवीन आज विधान परिषद की नौ सीटों पर होने वाले चुनाव और एक सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर भी महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। भाजपा और एनडीए की रणनीति इन सभी सीटों पर अधिकतम सफलता हासिल करने की है। सूत्रों के अनुसार, आंकड़ों और राजनीतिक समीकरणों के आधार पर भाजपा के हिस्से में तीन सीटें आने की संभावना मानी जा रही है। इन सीटों के लिए उम्मीदवारों के चयन को लेकर भी चर्चा होगी। पार्टी ऐसे चेहरों की तलाश में है, जो जातीय और सामाजिक समीकरणों के साथ-साथ संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले कार्यकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करते हों। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि यदि समर्पित और संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं को मौका दिया जाता है तो इससे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और सकारात्मक संदेश जाएगा। इसी को ध्यान में रखते हुए संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन किया जाएगा। बांकीपुर उपचुनाव के लिए नए चेहरे की तलाश बांकीपुर विधानसभा सीट से इस्तीफा देने के बाद अब यहां होने वाले संभावित उपचुनाव को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। नितिन नवीन इस सीट के लिए नए उम्मीदवार की तलाश में जुट गए हैं। जानकारी के मुताबिक, उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया है कि बांकीपुर विधानसभा से वही उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरेगा, जिसका क्षेत्र से सीधा जुड़ाव हो और जो स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच सक्रिय रहा हो। पिछले कुछ समय से कई बड़े नेताओं और बाहरी चेहरों के नाम संभावित उम्मीदवारों के रूप में चर्चा में थे, लेकिन अब पार्टी का रुख स्थानीय नेतृत्व को आगे बढ़ाने की ओर दिखाई दे रहा है। सूत्र बताते हैं कि नितिन नवीन कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं से लगातार फीडबैक ले रहे हैं। पार्टी ऐसे चेहरे की तलाश कर रही है, जिसकी क्षेत्र में स्वीकार्यता हो, संगठन में सक्रिय भूमिका रही हो और जो भाजपा की नीतियों को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचा सके। संभावना है कि पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच से ही किसी नए चेहरे को आगे बढ़ाकर बांकीपुर विधानसभा का उम्मीदवार बनाया जाए। संगठन और विकास दोनों पर फोकस राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नितिन नवीन का यह दौरा केवल संगठनात्मक बैठकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए वह यह संदेश भी देना चाहते हैं कि राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी मिलने के बाद भी उनकी प्राथमिकता में बांकीपुर विधानसभा और वहां की जनता बनी हुई है। विकास कार्यों की समीक्षा, मानसून की तैयारी, विधान परिषद चुनाव की रणनीति और उपचुनाव के लिए उम्मीदवार चयन जैसे मुद्दों पर होने वाली बैठकों को भाजपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इन बैठकों के आधार पर पार्टी की चुनावी और संगठनात्मक रणनीति और अधिक स्पष्ट हो सकती है।
Source link