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पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में अप्रैल माह में हुए जहरीली शराब कांड के बाद मद्य निषेध विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने 14 कर्मियों को निलंबित कर दिया है, जिससे विभागीय महकमे में हड़कंप मच गया है। यह कार्रवाई मोतिहारी के रघुनाथपुर और तुरकौलिया थाना क्षेत्रों में हुई घटना के बाद की गई है। अप्रैल में जहरीली शराब पीने से करीब दस लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद उच्च स्तरीय जांच शुरू की गई थी। कोई ठोस कार्रवाई या प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई थी मद्य निषेध विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, दरभंगा प्रमंडल के मद्य निषेध उपायुक्त की जांच रिपोर्ट के आधार पर यह निलंबन हुआ है। जांच में सामने आया कि जनवरी से मार्च के बीच संबंधित क्षेत्रों में स्पिरिट या अवैध शराब से जुड़े मामलों में कोई ठोस कार्रवाई या प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई थी। इसे कर्तव्य में लापरवाही मानते हुए अधिकारियों को दोषी ठहराया गया। निलंबित किए गए कर्मियों में तीन मद्य निषेध निरीक्षक, चार अवर निरीक्षक और सात सहायक अवर निरीक्षक शामिल हैं। निरीक्षक स्तर के अधिकारियों में मोतिहारी सदर के उत्पाद निरीक्षक मनीष सर्राफ, चलिष्णु दल के निरीक्षक मो. सेराज और सिकरहना सह सदर के निरीक्षक धर्मेंद्र कुमार शामिल हैं। अवर निरीक्षक, सहायक अवर निरीक्षक को किया सस्पेंड अवर निरीक्षकों में उदय कुमार, मुकेश कुमार, नागेश कुमार और धर्मेंद्र झा को निलंबित किया गया है। सहायक अवर निरीक्षक (मद्य निषेध) अजय कुमार, धर्मेंद्र कुमार सिंह, रोशनी कुमारी, बसंत कुमार महतो, कबिन्द्र कुमार, रंजीत कुमार और शशि ऋषि को भी निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान इन सभी कर्मियों का मुख्यालय मद्य निषेध ग्रुप सेंटर, भागलपुर निर्धारित किया गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, यदि जहरीली शराब कांड से पहले अवैध शराब के खिलाफ समय रहते कार्रवाई की जाती तो इस त्रासदी को रोका जा सकता था। लापरवाही और निगरानी में कमी को घटना का एक प्रमुख कारण माना गया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद मद्य निषेध विभाग में जवाबदेही तय करने की दिशा में सख्ती बढ़ी है। साथ ही जिले में अवैध शराब के खिलाफ विशेष अभियान चलाने की भी तैयारी की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
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